Saturday, April 4, 2020

“विरह के नांच” ( कहानी )

भौजी खाना बना रहीं थीं.तब तक पड़ोस की गीता आ गयी.."ए भौजी.आज बड़ा उदास हो,का बात है.आज भइया के ढेर याद आवत है का.आँय'...

ए हमार असहिष्णुता भौजी..

अपने आस पास रोज रोज दिखने वाले चेहरों पर गौर करेंगे तो आपको लगेगा कि अरे  इनको  देश कि कोई परवाह नहीं का..सब कुछ...

जीवन संगीत

एक पटाखा विमर्श…

ये मौसम बदलने का मौसम है। एक झटके में सुबह की नर्म हवा दोपहर की गर्म हवा में इस तरह बदल जाती है,मानों समूचे...
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