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सोसायटी का लोकतंत्र और कुत्ता राजनीति : एक हास्य कथा
सोसायटी अध्यक्ष एक रिटायर्ड अफ़सर थे और जीवन के खाली दिनों में लेखक बन चुके थे। उन्होंने सोसायटी कमेटी ग्रुप में एक डिजिटल सूचना लिखी थी, जिसका मजमून कुछ यूं था,
डोपामाइन डिटॉक्स – डिजिटल जंगल की आयुर्वेदिक जड़ी !
जिन चीज़ों को करने से हमारी खुशियों के व्याकरण की परिभाषा तय होती हो, एक वक़्त के बाद वही चीजें ज़िंदगी की स्लेट पर धुंधली पड़ने लगती हैं और फिर मन उचट...
एक गुमनाम आईआईटीयन
वो सुबह की ठंडी हवा की तरह यूँ ही टकरा जाते। कभी तुलसी घाट पर स्न्नान करते तो कभी विश्वनाथ गली के भेडियाधसान में पान खाते।
किसी सुबह हम...
पॉडकास्ट कथा
2007-8 के दौरान जब आइपॉड और ब्रॉडकास्ट से मिलकर पॉडकास्ट जैसा नया-नवेला शब्द दुनिया में पैदा हो रहा था, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि पॉडकास्ट की लोकप्रियता उस समय एकाएक...
लिट् फेस्ट से आहत कवि
कवि चिंगारी की खिड़की पर कविताओं का मौसम उतर आया था। पिछले एक हफ्ते में उन्होंने बयालीस कविताएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं को भेजी थी। भेजने को तो वो पचास कविताएं और भेज सकते...
नायिका का मन बदलने वाली सड़क
दोपहर की तल्ख धूप है और हवा तेज। नायिका के चेहरे से गिरता पसीना सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली सारी कम्पनियों को मुंह चिढ़ा रहा है।
फलस्वरूप नायिका की...
आखिर शक्तिमान ने मान ली हमारी बात…!
पहले शाकालाका बूम-बूम की पेंसिल से टीवी बनाने की लाख कोशिश कर चुके थे। शक्तिमान से भी कहा था कि क्या वो एक टीवी नही दे सकता। और चूंकि उस उम्र में...
नवकी बहुरिया का सिनेमा
आम के दिनों में सरेआम मार खाने का सुख याद करने बैठूं या आम के बगीचे में झूला झूलते हुए टहनी के टूट जाने का दुःख ? गिल्ली-डंडा के लिए मैदान खोजने...
कौन जात हैं मास्टर साहब ?
पिछले दिनों बनारस के आसमान में एक अनजानी सी खुशी फैल गई। देखते ही देखते सामने घाट से लेकर गोदौलिया तक की गलियों के वो सारे कमरे खाली होने लगे, जिनमें कभी...
राशन कार्ड में डाटा…
आजकल शरीर मल्टी विटामिन और मिनरल्स की कमी से जूझने के बाद भी उतना कमजोर नहीं दिखता, जितना दो जीबी डॉटा खत्म हो जाने के बाद दिखता है।
बड़े...

















