Thursday, April 25, 2024

कभी-कभी खुद से बात करना क्यों जरूरी है ?

SELF TALK - आत्मसंवाद का एक अंश आज बनारस.कई दिन बाद आके कमरा खोलता हूँ। ओह!.होली में गाँव चले जाने के कारण नाराज, मकान मालिक...

आप गायत्री ठाकुर को जानते हैं ?

जब घरे घरे टीवी , टेप आ रेडियो ना रहे मनोरंजन के साधन कम रहे हतना गायक आ कलाकार लो ना रहे लो लोग...

जीवन संगीत

कहीं न जाने वाले रास्तों पर !

मौसम अब हथेली की तरह गर्म होने लगा है। सुबह का सूरज खिड़की पर आकर जगा जाता है। दोपहर भी कहती है,रुकना...
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भारतीय बुद्धिजीवी और ऑरगेज्म का बाज़ार !

आजकल महुआ,आम,लीची ही रस से आच्छादित नहीं हैं..फेसबुक टाइमलाइन भी रसमय होकर फीमेल प्लेज़र और आर्गेज्म से आच्छादित हो चुका है।

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