आज का आदर्श रिसर्च स्कॉलर कल का आदर्श पति है।
साँझ होने को है। बारिश रूकने का नाम नहीं ले रही है। इसी साँझ की बारिश में एक प्रेमी युगल बस स्टॉप पर खड़ा है।अंधेरा अभी हुआ नहीं है लेकिन लड़के की...
रुकना जरूरी क्यों है ?
चलना एक कला है और रुकना भी। लेकिन ये भौतिकतावादी समय हमसे कह रहा है कि भागो,भागो नहीं तो तुम पीछे छूट जावोगे। दिन-रात मोटिवेशनल स्पीकर चिल्ला रहे हैं,"अरे,तुम यही हो। वो...
एक विवाहित कवि का दुःख !
शाम का मनभावन समय है। बाहर का मौसम रोमांटिक हो चला है। बादलों के गरजने की ध्वनि के साथ बारिश की बूंदे खिड़की से होते हुए कवि चिंगारी जी के बेडरूम तक...
युवा नेता बनाम ‘युवा तुर्क’ ( चन्द्रशेखर की पुण्यतिथि पर विशेष )
बहुत छोटा था। तब ये भी कहाँ पता था कि लोक सभा क्या होता है और विधानसभा क्या होता है।
लेकिन उस वक़्त नेताओं की गाड़ियां और आसमान में...
बॉम्बे से चिट्ठी बनारस के नाम !
गुरु,तुमने आज हाल-चाल पूछा है। पूछा है, "कहो कैसे हो बम्बइया बाबू ? कइसा लग रहा है बम्बई में,याद नहीं आती न अब बनारस की ?"
भोजपुरी संगीत अश्लील क्यों है ? ( इतिहास और वर्तमान पर एक नज़र )
वो साठ का दशक था,तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे। ले-देकर दशहरा के समय दरभंगा और अयोध्या से आने वाली रामलीला मण्डली का आसरा था। कहीं से...
कैम्पस एक बगीचा है,जिसमें हमें सींचा जाता है..!
कॉलेज का पहला दिन ! आसमान में धूप और बादलों की जंग जारी है,लेकिन इधर तो खुशी बिन बादल के बरस रही है।
एक देहात के स्कूल से पहली...
बिरला हॉस्टल की होली : स्मृतियों के चटक रंग
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मेरा वो पहला साल था। खपरैल और टीन शेड के स्कूल से निकलकर एक केंद्रीय विश्वविद्यालय का छात्र होने की प्रसन्नता मेरी आंखों में उसी मात्रा में चमक...
कवि चिंगारी की कविता और पेट्रोल !
आज बड़े दिनों बाद चाँदपुर के परिचित कवि डॉक्टर अलगू आतिश चिंगारी उर्फ़ लुकारी जी दिख गए। कंधे उनके वैक्सीन लगवाने से नहीं बल्कि कविता के बिम्बो के बोझ से दबे हूए...
व्यर्थ आवाज़ों की सार्थकता
साँझ सवेरे खिड़की पर गौरैया,कबूतर आकर बोल जाते हैं। न जाने क्या, बहुत जल्दी-जल्दी ! कभी ख़ूब तेज आवाज़ में,कभी मद्धिम। कभी लगता है कोई मेरे ऊपर ताना मारकर चला गया,

















