वो आवाज: जिसे सुनते ही सब अपना काम छोड़ देते थे
तब Radio का जमाना था। मनोरंजन के इतने साधन और इतने कलाकार नही थे। Radio ,साइकिल और घड़ी स्टेटस सिम्बल हुआ करता था।आकाशवाणी से गीत आने का समय बच्चे-बच्चे को याद था। जिनके पास...
कभी-कभी खुद से बात करना क्यों जरूरी है ?
SELF TALK - आत्मसंवाद का एक अंश
आज बनारस.कई दिन बाद आके कमरा खोलता हूँ। ओह!.होली में गाँव चले जाने के कारण नाराज, मकान मालिक के पंचवर्षीय पुत्र ने अखबारों के पन्ने काट-काट के दीवाल...
आप गायत्री ठाकुर को जानते हैं ?
जब घरे घरे टीवी , टेप आ रेडियो ना रहे मनोरंजन के साधन कम रहे हतना गायक आ कलाकार लो ना रहे लो लोग खेत से काम कर के आवे सुते के बेरा घर...
हमार भोजपुरी ग़ज़ल
जे कबो सबका के रस्ता बतावत रहे
देखीं उहे आज रस्ता भुलाइल बा
काल्ह घर घर में जाके हमके जोहत रहे
आज उहे अपना घर में लुकाइल बा
इहे भइल खता उनसे मुहब्बत भइल
इ दिल ना ,दरिया ह...
आज दुनिया क्यों बोलती है “वाह उस्ताद”
1955 के आस-पास मुंबई के एक घर में पति-पत्नी में सलाह चल रही होती है कि उनका बेटा बड़ा होके क्या बनेगा? माँ कहती है.. नही ये पढ़ेगा .....पिता कहतें हैं..नही ये वही करेगा...
एक ऐसी भाषा जो हर जगह समझी जाती है
MUSIC कार्यक्रम के सिलसिले में अक्सर यात्रावों में रहना होता है। कभी कभी यात्रायें इतनी ज्यादा हो जाती है कि जीवन खानाबदोश जैसा लगने लगता है ।
हर दूसरे दिन नई जगह नए लोग नई...
Blog शुरू करने की रोचक कहानी
मित्रों....
Blog बनानें से ये तात्पर्य कतई नही है की अब मै लेखक हो गया,क्योंकी आमतौर पे लेखकों के Blog होते हैं,पर यकीन मानें ये एक पाठक का Blog है जिसे अभी पढना भी ठीक...














