Home Blog Page 2

आई स्टैंड विद…..

दूसरों का झगड़ा-बवाल पूरे मनोयोग से देखने की ललक मनुष्य में कब पैदा हुई, ये आज भी व्यापक शोध का विषय है। मामला अगर जूतम-पैजार तक चला जाए तो...

आदिपुरूष देखने के बाद हनुमान जी का इंटरव्यू !

हनुमान जी आदिपुरुष देखकर अभी सिनेमा हाल से निकले ही थे कि एक पत्रकार नें उन्हें पहचान लिया, "प्रभु, एक इंटरव्यू दे देते तो मेरा चैनल मोनेटाइज हो जाता..!"

डॉक्टर, ये देश बीमार है….!

वो छोटे शहर के बड़े नेता थे। अभी जनता नें उन्हें चुनाव जीताकर देश सेवा करने का मौका नहीं दिया था। इसलिए उन्होंने समाज सेवा करने का निर्णय लिया था।

हँसी-खुशी हो ली…

बाहर का मौसम बदलते ही मन का मौसम भी बदलने लगता है। इन दिनों खिड़की खोलते ही ताजी हवा जादू जैसा काम करती है और देखते ही देखते चित्त में बैठी धूल...

अश्लील हरकतें ना करें……!

चढ़ाई बहुत लंबी हो। रास्ता गुमनाम हो। दूर-दूर तक कोई आता-जाता दिखाई न दे। बड़ी मुश्किल से कुछ दिखाई भी दे तो वही बिसलेरी की बोतलें,फटे जूते,चिप्स के...

एक माइल्ड सा दर्द !

सब्जी की दुकान पर खड़ा होते ही एक मीडिल क्लास आदमी सबसे पहले इकोनॉमिस्ट बन जाता है। ग़लती से दो-चार सौ की सब्ज़ी आपने ले ली तो महंगाई की तरह आपकी बीपी...

भारतीय बुद्धिजीवी और ऑरगेज्म का बाज़ार !

आजकल महुआ,आम,लीची ही रस से आच्छादित नहीं हैं..फेसबुक टाइमलाइन भी रसमय होकर फीमेल प्लेज़र और आर्गेज्म से आच्छादित हो चुका है। एक पक्ष अपने मदन छतरी में सुख को...

कहीं न जाने वाले रास्तों पर !

मौसम अब हथेली की तरह गर्म होने लगा है। सुबह का सूरज खिड़की पर आकर जगा जाता है। दोपहर भी कहती है,रुकना नही है लेकिन साँझ आते-आते मन किसी छोटे बच्चे सा...

स्मृतियों में बाबूजी :

और तब मेरी धड़कन रुक जाती,जब बाबूजी बताते कि एक रात वो जब वो मकई के खेतों में अकेले सोए थे। आसमान चटक चाँदनी से नहाया हुआ था। हवा सनसना रही थी।...

छठ पूजा- दुःख का ढंग अलग है लेकिन रंग एक है।

रात के साढ़े नौ बज रहे हैं। अंधेरी में हुई आठ घण्टे की एक लंबी सीटिंग के बाद आँखों के सामने अब अंधेरा छानें लगा है। जाना तो आरामनगर भी था। लेकिन...

MOST POPULAR

HOT NEWS