intolerance,intolerace story

अपने आस पास रोज रोज दिखने वाले चेहरों पर गौर करेंगे तो आपको लगेगा कि अरे  इनको  देश कि कोई परवाह नहीं का..सब कुछ सामान्य है क्या?
जैसे मुन्ना भाई रोज अखबार दे जाते हैं…कभी अखबार नहीं पढ़ते…उनको तो बस इसी कि चिंता है कि कैसे आज अधिक से अधिक अख़बार बेच दें….सोहन कपड़ा प्रेस करता है….बाबू भाई कि चाय की दूकान है..

दिना चौधरी आज दू बल्टा  दूध लेकर आये हैं…

गली में सब्जी  देने वाली बुढ़िया  माई भी परेशान है कि कोहंडा बीस रुपया में बेचे की पनरह में।?
हम आप सुबह से शाम तक पल पल बदलते इनके चेहरे को देखतें हैं….जिंदगी से जंग में इनके चेहरे कैसे मुरझाते जातें हैं।

कल मैंने भी मुन्ना से पूछा..सोहन से भी.बाबू भाई से,दिना से बुढ़िया माई से.. “असहिष्णुता मने जानते हो..intolerance का नाम सुने हो ? सबने कहा एक लय एक राग में कहा…..”इ कवन रोग है अतुल बाबू?

हमने मुन्ना बाबू से धीरे से बताया…
“असहिष्णुता बुद्धिजीवियों की उस भौजाई का नाम है…जिसका पीया परदेश रहता है लेकिन जब ना तब कोई छेड़ देता है…..
पहले इसके सगे देवर साहित्यकारों ने छेड़ा  उसके बाद दूर दूर दराज के देवर फिल्मकारों ने भी छेड़ कर मजा ले लिया….
“का हो भौजी..अरे भइया नही हैं तो हम हैं न ….?
मुन्नवर राणा साहेब भी छेड़ कर शांत हुए थे तब  परम् देवर शारुख भाय भी छेड़ ही डाले….फिर बिहार का चुनाव हुआ..समाजवाद कायम हो गया…राम राज्य की स्थापना हुई..लव कुश गद्दी सम्भाल लिए…देश अमन चैन की सांस लेने लगा…तब तक एक  बावरा देवर आमिर खान की जवानी मचलने लगी… इस बावरे ने भी  सोचा क्यों न भौजी का हाल चाल पूछ लिया जाए….. बस पूछ दिया….आज माहौल फिर गर्म है। भौजी परसान हैं।
मुन्ना भाई कहे हमसे “काहें अतुल भाई….सब भौजी को काहें छेड़ रहे..होली भी तो दूर है सरवा..”
हम कहे कि भाय..”जब तक मोदी नामका आदमी देश में  रहेगा तब तक इस भौजी की इज्जत से ऐसे ही खिलवाड़ होता रहेगा। देवरों की जवानी मचलती रहेगी…”

मुन्ना मुस्कराया..कहा “ए भइया..एही से हम टीवी नहीं देखते..न ही कभी अखबार पढ़ते हैं..न ही ये जानतें  हैं कि
फेसबुक व्हाट्स अप किस चिड़िया का नाम है..हमको तो बस इहे चिंता है कि जल्दी जल्दी कुछ पैसा हो जाय तो मेहरारु के लिए एक पायल खरीद दें…हमरे साली का बियाह पड़ा है। वइसे इ बताइये जरा कि  इ बुद्धिजीवी क्या होता है?  इहो कवनो रोग है का”?

हमने उसको समझाइस दिया..”हाँ बहुते बरियार रोग है...मुन्ना ने कहा कुछ  लक्षण बताइये भइया….हमने कहा देखा भाय..
“सबसे बड़ा लक्षण यही है कि इस रोग का रोगी खुद को डाक्टर समझने लगता है और सबको मरीज समझकर इलाज बताने लगता है।

मुन्ना चिहा गया…बक भइया..काहें मजाक कर रहे आप… तनी आराम से समझाइये।

हमने कहा देखो मुन्ना भाई…”

बुद्धिजीवी वो आदमी होता है…जो एसी में बैठकर खेती की बातें करता है..
बिसलेरी पीते हुए “जल प्रदूषण के कारण” पर व्याख्यान देता है….
अपने मेहरारू को चार बातें  सुनाते हुए…स्त्री विमर्श पर लेख लिखता है.. बस इ समझो कि
वो सब कुछ बदल देना चाहता है ,सिवाय खुद के।

मुन्ना हंसा…..मानो कह रहा हो… नहीं बनना बुद्धिजीवी  न ही बनना  किसी का देवर हमें।
“इ तो खुदे भयंकर असहिष्णु लोग हैं।

3 COMMENTS

  1. गजब मुझे साहित्य की की इतनी समझ नहीं, पर आपकी रचनायें मुझे बहुत पसंद आयी। I m very much fond of reading and during my childhood use to read old hindi novels from my Dadaji’s collection. I feel the same after reading ur literature. Nw I m big fan urs. Egerly waiting for ur more writings and for sure a novel from you. Thanks alot for such lovely hindi creation. My heartly wishes for your very bright future.

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