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हमारे यहां लौंडे की शादी के दिन जैसे-जैसे नजदीक आते जातें हैं.वैसे-वैसे उसके स्वभाव में ही नहीं वरन पहनावा,चाल-चलन,कालर ट्यून से लेकर वालपेपर तक बदलते जातें हैं.यहाँ तक की उसके सुहाग रात के सपने चेंजायमान हो जातें हैं.सपने में आने वाली स्टोरी ही नहीं उसमें आने वाले लोग बदलते जातें हैं.सनी लियोन और आलिया भट्ट सेवानिवृत्त होकर पेंशन पाने लगतीं हैं.

बेचारी बहुत दिन इस भावी दूल्हे के सपने में आकर उसके दुःख दर्द की साझीदार रहीं हैं.इसलिए शादी तय होते ही उन्हें पेंशन देना जरूरी हो जाता है.

अब तो नवम्बर के जाड़े के जिस दिन से बियाह तय हुआ उस दिन से ही सुग्गी जैसी मेहरारू सपने में आती है.हाय! कितना मीठा बोलती है फोन पर.”ए जी खाना खाये हैं.?आप नहीं खायेंगे तो हमू नहीं खायेंगे..इतना सुनते ही लौंडे का पेट भर जाता है.कोई शादी शुदा अनुभवी उसे समझाता है.”अबे सुन..शादी के पहले ही मेहरारू की आवाज कोयल जैसी लगती है..बाद में तो ऐसे लगेगा जैसे सूरमा बेचने वाला फटा हुआ स्पीकर बोल रहा हो.

और सुन आज तू अठारह घण्टा बात कर रहा न.शादी के एक दो साल बाद उसकी आवाज सुनकर..तू ईयर फोन लगा लेगा.लौंडा मानता नहीं.बिना लड्डू खाये पछताना सही भी नहीं है.पत्नी पीड़ित आत्मावों को भगवान सहन शक्ति दें.

लौंडे द्वारा.लड्डू के इंतजार में नवम्बर से ही एक-एक दिन ऊँगली पर गिना जाने लगा.अब नवम्बर से अप्रैल की दूरी ऐसे प्रतीत होती है मानों.23 अप्रैल को सुहाग रात में उसका का नया जन्म होगा.जाड़े में वैसे भी मीठे सपने आतें हैं..क्या करे कोई.

लेकिन ये क्या.22 अप्रैल आ गया.पारा 43 डिग्री.हवा का नामोनिशान नहीं.20 अप्रैल से ही बिजली का हाल बेहाल.अब लौंडा क्या करे.कभी अपने बाबू जी को कोसता है तो कभी अपने ससुर को तो कभी उस लगन देखने वाले पंडी जी को सोचता है.

अरे जब ग्यारह रुपिया की दक्षिणा में मंगल को उठाकर शनि के घर में फ़ेंका जा सकता है.पाँच सौ एक में स्वर्ग सिधार गए पितरों को यदि बिसलेरी पिलाकर तृप्त किया जा सकता है तो हे पंडी जी आप इस मुई गर्मी में ही शादी बियाह का लग्न क्यों निकालते हैं ? महराज कुछ ले देकर फरवरी में शिफ्ट कर देते तो कितना अच्छा होता न. ?

हमारे गाँव के सोहना तो पिरयंकवा को भगाकर ले गया दोनों कोर्ट में बियाह किये.बाहर निकले समोसा चाय पिए.दो चार साल खूब मेहनत किये.आज खूब मजे से हैं।
अच्छा.वेद शास्त्र में एक गन्धर्व विवाह का भी तो जिक्र है..उ नहीं हो सकता ?

अरे इस गर्मी के मारे कुछ लोगों का बस चलता तो खरमास में किसी खलिहर दिन देखकर अपना बियाह कर लेते.भांड़ में जाएँ पंडी जी आ उनका पतरा। लेकिन बाबा अभी समझाइस दिये हैं की परम्परा के पीछे कई सार्थक वजहें भी तो हैं बेटा..जिसका हम सभी को सम्मान करना ही चाहिये.

लेकिन बाबा को कौन समझाये कि इस परम्परा और गर्मी के मारे होने वाला दुःख अब बर्दास्त के बाहर है.शादी में इतनी गहमा गहमी है कि कोने कोने में लोग रिश्तेदार पड़े हुये हैं..हर घर में सामान रखा है.

दोपहर में हल्दी लगाने के टाइम ही बिजली गायब हो गयी.अब जनरेटर के लिये तेल लेने दस किलोमीटर दूर जावो न.

आजकल उत्तर प्रदेश में बिजली साइकिल के स्पीड से आती है और हवाई जहाज के स्पीड से चली जाती है.

इस स्पीड से सबसे ज्यादा दिक्कत तो दिल्ली और नोएडा से शादी में पधारी मेरी प्यारी प्यारी भौजाईयों को है..बेचारी दिन भर यहीं बताती हैं कि उनके यहां कितने टन का एसी लगा है.इहाँ 24 घण्टा देसी में रहने वाले कन्फ्यूज हैं कि सरवा इ एसी का टन आ क्विंटल से क्या सम्बन्ध है।

बेचारी भौजाई लोग वेक अप न रहें तो उनका सारा मेक अप पसीने में बह जाए.कैसे कैसे इस गर्मी में कभी गहने को सम्भालती हैं.कभी महंगी साड़ी को.हाय ससुर जी आ गए पल्लू सीधा करो.बीच में रोते पिंकुआ को पापा बेचारे सम्भाल रहें हैं.

इन पापा लोगों कि हालत देखकर लगता है कि शादी होते ही आदमी गधा हो जाता है.तीस पर कभी सेल्फ़ी लेने की चिंता.इधर टप टप पसीना चू रहा है.उधर फेसबुक whats app अपडेट.’लॉट्स आफ फन इन माय देवर मैरिज.’. ओह!..हाय! वीडियो रिकार्ड करने वाले उनको ठीक से लिया की नहीं..? ‘एक दिन में चार बार साड़ी फलानी बो ने चेंज कर दिया हाय! हम अभी तक तीन बार…बेइज्ज़ती खराब हो जायेगी चिंकी के डैडी…’

डैडी बेचारे परेशान हैं कि खोवा लेने सिकन्दरपुर गया खेदना अभी तक आया क्यों नहीं?…उधर पंडी जी कथा में सुनने को बुला रहें हैं। इधर बड़े बाबूजी पूछ रहें हैं.”आहो आसुतोस जिराबस्ती के राय साहेब के नेवता दियाइल बा?।”

तब तक चिंकी की मम्मी उसके पापा से जोर से कहतीं हैं.”आप तो सुनोगे नई मेरी…ये पिंक वाली साड़ी कैसी लगेगी.”.?

चिंकी के पापा का पारा चढ़ रहा है.खुँसाकर कहतें है.”एकदम ऐसे जैसे गुलाब के खेत में आग लग गया हो..और फायर ब्रिगेड की गाड़ी पंचर।” लो अब.भाभी का गुस्सा आठवें आसमान पर..दिल्ली जाकर बताएंगी उन्हें..चिंकी के पापा खैर मनाएं। चिंकी रोती है..”पापा आइसक्रीम”.

सबसे मजा आता है शादी के शाम को.डीजे बज रहा है..”ब्लू है पानी-पानी….चार बोतल वोदका,बफैलो सिस्टम सजा है.चाट,गोलगप्पे और आइसक्रीम करीने से सजें हैं.फेसबुक पर 20 घण्टा ऑनलाइन रहने वालीं कुछ एन्जेल प्रिया और स्वीट सोना टाइप कन्याएं परेशान हैं कि लोग उन्हें आज लाइक कमेंट कर रहे हैं की नहीं.

एक ने प्लेट में सिर्फ एक पापड़ लिया है.एक ने बस थोड़ा सा आइसक्रीम.कम्पटीशन चालू.किसको अपने फिगर की ज्यादा चिंता है.

उधर बिगन बो हजामीन के एक प्लेट में आठ रसगुल्ला सात कचौड़ी और पनीर से टकराकर धरासाई हो गयें हैं.एन्जेल टाइप लड़कियां इसे देखकर हंसती हैं.मुझे पापड़ के दुर्भाग्य पर तरस आता है.

सबसे बड़ी चिंता कि एक घण्टा इकतीस मिनट मेक अप करने के वाद भी कोई किसुना टाइप लौंडा किसी एंजेल रोजी की ओर नहीं देखे तो ये कितने शर्म की बात है न.?छोड़िये मैं भी न जाने कहाँ कहा चला जाता हूँ। काम की बात करतें हैं.सुहाग रात में भी हाल बहुत बुरा है.

सुहाग सेज सजा है.इत्र-फुलेल, महक रहे.केशर मिश्रित दूध का गिलास रखा है.मूड पूरा ROMANTIC है.दूल्हे के मन में आज विविध भारती के गाने सुहाने बज रहे.
दुल्हन ऐसे शरमा रही..मानों शरमाने का कोई शार्ट टर्म कोर्स किया हो.नक्काशीदार पलंग में मख्खनदार बेडशीट और तकिया पर छूई मूई सी दुल्हन जी को देखकर
उनके प्राण नाथ जी आहें भर ही रहे होते हैं..’हाउ स्वीट.’..तब तक बिजली के प्राण निकल जातें हैं।
उफ्फ्!

एक मिनट में फिलिंग रोमांटिक मूड, फिलिंग टायर्ड में बदल जाता है.दुल्हन जी धीरे से कहतीं हैं…”प्लीज आप आज मुझे टच नहीं करेंगे.आज दूर से ही इन्वर्टर लगवाइये तब”.

प्राण नाथ जी जैसे तैसे अपने मन को समझातें हैं.
ये सोचते हुए की साला शादी मुझसे हुई है या इन्वर्टर से।
का कहें.कई ने तो बिजली के अभाव में सुहाग रात को सुहाग दिन में मनाने का फैसला कर लिया है..दुःख की इंतहा नहीं है साहेब।

अकलेस पुत्र मन से मुलायम जी सुन रहें हैं.योगी जी और मोदी जी ?.आप लोगों को चाहिए की कम से कम रात को तो बिजली दे दिया करें सरकार.तब तक. जब तक की रिमझिम बरसात न होने लगे। अरे भले योजना का नाम.”समाजवादी सुहाग रात योजना..” ही रख लें.लेकिन इस सुहाग रात के मौसम में बिजली तो ठीक कर दें..

वोट बैंक खाली तुष्टिकरण से थोड़े बनता है महराज। चुनाव करीब है।

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संगीत का छात्र,कलाकार ! लेकिन साहित्य,दर्शन में गहरी रूचि और सोशल मीडिया के साथ ने कब लेखक बना दिया पता न चला। लिखना मेरे लिए खुद से मिलने की कोशिश भर है। पहला उपन्यास चाँदपुर की चंदा बेस्टसेलर रहा है, जिसे साहित्य अकादमी ने युवा पुरस्कार दिया है। उपन्यास Amazon और flipkart पर उपलब्ध है. फ़िलहाल मुम्बई में फ़िल्मों के लिए लेखन।

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