हाय…! जीजा आप केजरीवाल न हुऐ ( वायरल पोस्ट )
यूँ तो जीजा नाना प्रकार के होते हैं...किसिम किसिम के ।अफ़सोस कि जीजा साली के सम्बंधों पर आजतक सिर्फ सड़क छाप शायरी ही हुई है व्यापक शोध होना बाकी है .
लेकिन जीजावों के वर्गीकरण...
ओ पिया परदेसिया ये धान की रोपनी ( विरहन व्यथा )
पिछले साल बैसाख में भौजी गवना करा के आई थी,ककन छूटे दू दिन हुआ था और मेहँदी अभी छूटा नहीं था कि चार दिन बादे गेंहू का कटिया शुरू हो गया। हाय! रे किसानी...
मजबूरी...
आँगनबाड़ी वाली भौजी ( स्त्री विमर्श की एक कथा )
गाँव के बाहर पुल पर बैठे पश्चिम टोला के बबलूआ ने नन्हकू बो भौजी को देखते ही मोबाइल कि आवाज को बढ़ाया गनवा उहे था.जिसमें महान अश्लील गायक सीरी खेसारी लाल जादब जी अपनी...
बनारस प्रेम कथा ( वायरल पोस्ट )
कार्तिक पूर्णिमा से तीन दिन पहिले शाम का समय...गंगा आरती की तैयारी..पर्यटकों और नाव वालों में पैसे को लेकर बहस..पानी का श्रृंगार करतीं नावें...घाट के बसिंदों में देव दीपावली का अलग जोश..दसास्वमेध से दाहिने...
मनोरंजन के लिये नही है संगीत
अपने चाइना वाले मोबाइल पर भले बलिया जिला का सिंकूवा..."रतियाँ कहाँ बितवला ना" जोर से बजाए.या बीएचयू के सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉस्टल में रहने वाले हिंदी साहित्य में भक्तिकाल के शोधार्थी.सीरी फलाना जी...
लंठ सम्मेलन से डबल गर्लफ्रेंड की लाइव कथा
जवानी में प्रवेश और कालेज लाइफ में सिर्फ आवेश ही आवेश होता है.जहाँ केमिकल लोचा कब कहाँ फंस जाय.कोई ठीक नहीं जहाँ हाथ का प्रयोग सिर्फ खाने नहाने और पैखाने में नहीं कभी कभी...
बचपना बचाने के सूत्र
दो रुपया के पारले जी के लिए दो घंटे रोने और चुराये हुए गेंहूँ बेचकर समोसा खाने के दिव्य सुख के आगे आज महंगे से महंगे होटल का खाना भी फीका लगता है..ये तब...
वो गाँव की औरतें…
कल बलिया से बनारस आते वक्त ट्रेन में जिला मोतिहारी बिहार कि पचपन वर्षीया सुनैना देइ उनकी साठ वर्षीया बहीन.और पन्द्रह बीस महिलायें.साथ में जिला बेगूसराय बिहार के कमला प्रसाद और दो चार पचपन...
आधुनिकता ने काट दी प्रेम की डोर
लाख हनी सिंह का दौर हो पर गाँव में रहने वाला लौंडा आज भी दिल टूटने पर 'ब्रेक अप की पार्टी रख ली' नहीं सुनता ।आज भी अल्ताफ राजा उसके महबूब गायक हैं..गाँव के...
भारतीय वीरांगनाओं की कहानी,जो इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं है
संगीत के ग्रंथों में परस्पर विरोधाभास नें आज संगीत के छात्रों के सम्मुख बड़ा ही भ्रमात्मक स्थिति उत्पन्न कर दिया है.ग्रंथों में इतने मतभेद हैं की समझ में नहीं आता की सच किसे माना...

















