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क्या है कि आजकल भारी मात्रा में रोज मित्रता निवेदन आ रहें हैं.कुछ लोगों ने बेकायदे अतुल बाबू को बड़ा लेखक मान लिया है.और कुछ लोग तो भ्रमवश  परसाई,प्रेमचन्द,रेणू,श्रीलाल शुक्ल और न जाने क्या क्या कहने लगें हैं उन्हे  नहीं पता इससे परसाई, प्रेमचंद.रेणू,श्रीलाल शुक्ल की आत्मा को कितनी मात्रा में कष्ट हो रहा होगा..

लेकिन इन सब उपलब्धियों को देखते हुए कल पूज्य संता श्री श्री 1420 राधे माँ बड़ी प्रसन्न हुईं.और मुझ दीन हीन को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा.एक बार शक हुआ कि ये सुर्ख लाल लिपस्टिक,करीने से सेट किये गए आइब्रो और मनीष मल्होत्रा की डिजायनर परिधान में  कोई रामगोपाल वर्मा की भूतनी तो नहीं…..लेकिन नहीं।

उस परम तेजोमयी आभा का दर्शन कर सोचने को विराम लगा.भरम फूटकर चकनाचूर हो गया था,मेरी तीनों आँखे खुल गयीं थीं..तन्द्रा टूट  चुकी थी..”अरे ये तो साक्षात राधे माँ हैं.”.हम शीश नवाने ही वाले थे तब तक उनकी फ्रेंड लिस्ट में मुस्कराते हुए पूज्य असंत सीरी सीरी 13420 आशाराम बापू दिख गए.मेरी श्रद्धा भावना ओवर फ्लो होने लगी.लगा आज तो सच में धन्य हो गए अतुल  बाबू.

जब सीरी सीरी 1420 राधे माँ के टाइमलाइन पर हम दर्शनार्थ गए तो देख रहे कि सीरी सीरी 15420 बाबा रामपाल ने उनके टाइम लाइन पर..” थैंक्स फॉर एड मी राधे..लूकिंग सो हॉट…..” लिखा है.अब तो साहेब लगा की हम फेसबुक पर बुद्धत्व को उपलब्ध हो जाएंगे.. इससे पहले की सम्बोधि का विस्फोट हो जाए….यहाँ से भाग लो.

भाग कर वापस आया तो देख रहा वासेपुर वाले रामाधीर सिंह जी मित्र बनने वाली कतार में खड़े होकर ऐसे देख रहे हैं मानों फैज़ल को खोज रहे हों.लो अब कक्षा चतुर्थ में पढ़ा “आसमान से गिरे खजूर पर अटके” वाला मुहावरे का भावार्थ याद आया.मन किया कि अपने फैजल से कहूँ “अबे चाइनीज पिस्तौल से गोली मारी थी क्या.?रामाधीर सिंगवा ज़िंदा है.”.

बस कपार में दर्द हुआ…फेसबुक बन्द किये और मच्छरदानी में तेल लगाकर सो गए ..रात को बारह बजकर एक घण्टा बत्तीस मिनट हो रहे थे..बिजली समाजवादी मोड में आ जा रही थी..सारे मच्छर पाकिस्तान के आतंकवादी कैम्पो से प्रशिक्षित होकर मेरे मच्छरदानी रूपी इंडिया में सेंध मार रहे थे.बगल में  कुछ उत्साही कूल ड्यूड  किसी फलाना ड्यूड के पैदाइसी दिवस के गम में दारु पीकर लहरिया स्टेप वाला डांस कर रहे थे.मेरे पास जगने के सिवा कोई चारा न था.

आदतवश फेसबुक खोला और खोलते ही मित्र बनने के लिए व्याकुल कामुक नज़रों से निवेदन कर रही सीरीमती सनी लियोनी जी को पाया.उनके इस देखने कि जालिम अदा को देखकर मेरे आंतरिक भू-भाग में मीठी हलचल हुई.मन में आया पुछूं ‘इतनी रात को  मेरी परीक्षा क्यों ले रहीं देवी.? अरे मेरे आस पास जालिम लोशन भी नहीं की लगा लूँ ,रहम सरकार….

ले-देकर एक ही उपाय था.. कान में रुई लगाये और मच्छरदानी में अभिनव बिंद्रा की कसम खाकर पांच सात मच्छरों को मारा और सभी सन्तों को प्रणाम किये…सो गए..सुबह नींद खुली… चेतना लौटी..किशोरी अमोनकर जी का राग जोगिया सुनते हुए चाय पीया,थोड़ा आज्ञा चक्र पर ध्यान किया  …साथ में उस्ताद शाहिद परवेज साहब का अहीर भैरव में सितार पर आलाप भी  सुना और सोचने लगा.

जो कभी फेसबुक पर Angel प्रिया बनकर घूमते थे उनमें से कुछ उन्नत किस्म के लौंडे राधे माँ,आशाराम,रामपाल ,रामाधीर सिंह और सनी लियोनि बनकर घूम रहें हैं – कौन कह रहा कमबख्त की देश में विकास नही हो रहा.?.अरे  देखो तो आईआइएन छाप ड्यूडों ने कितनी तरक्की कर ली.!

आज भगवान राम, कृष्ण और कृष्ण जी के राधा जब अपना ये हाल देखते की आशाराम भी राम लगाकर भगवान हो गये हैं..राधा जी मिनी स्कर्ट में लिपस्टिक लगाकर जवान हो गयीं हैं…रामपाल बाबा कामपाल हो गये हैं…ड्यूड मण्टुआ एन्जेल प्रिया

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बनकर पुरषोत्तम चौबे से रोज तीस रुपया का रिचार्ज करवा रहा है.तो कल्कि अवतार का डेट फिक्स कर देते.कृष्ण जी राधा के गम में सुदर्शन चक्र पर सवार होकर सीधे सिलिकॉन वैली कैलीफोर्निया पहुँचते.और जुकरबर्गवा को एक कंटाप लगाकर कहते..”अबे ई का कर दिया है की तुम्हारे कारण लोग दू मिनट में  स्त्री से पुरुष और पुरुष से स्त्री हो जा रहें हैं..हमारे समय तो लाखों बरस तपस्या करनी पड़ती थी.जुकरबर्ग नटवर नागर नंदा के चरणों में गिरकर रोने लगता.

“प्रभु माफ़ करें मुझ अधम का दोष नहीं..प्रभु ये तो प्यार  का ओवरडोज देकर  बात कर रहे उन मॉम्स पॉप्स का दोष है.जो बच्चे के सो  जाने के बाद आफिस से आतें हैं…और एक विशेष प्रकार का मुंह बनाकर सुबह कहतें हैं.”अले ले ले गुल्लू बेटा गन्दी बात..बदमाछी नई.ये नई करते बेटा ये गन्दे बच्चे करते हैं..आप तो अच्छे वाले बाबू हैं. देको देको छोटा भीम ढोलकपुर से तुम्हारे लिए लड्डू लाएगा।…”

अब भगवन…गुल्लू इ बनावटी प्रेम में क्या करेगा..इनके मॉम्स पॉप्स कब समझेंगे कि ये आप आप कहके बात करने का बनावटी और झूठा दिखावा इनके बच्चे को खा रहा हैं।

प्रभु एक जमाना वो भी था जब मॉम्स पॉप्स नहीं माई बाबूजी हुआ करते थे..एक तो चिखुरी,गोधन,और महेश,दिनेश,प्रमोद परमात्मा,सत्यप्रकाश से अच्छा कोई नाम उन्हें नहीं मिलता था .बस प्रभु कभी कभार प्यार से प्रमोद को सोनू कहके बुला लेते थे…भले घर के बाहर सोनू सनुआ हो जाता था. बाकी माई बाबूजी को सम्मान के लिए नालायक कमीना बेहूदा..से नीचे के शब्दों का प्रयोग  वर्जित था.रोज चप्पल और बेलन जैसे दिव्यास्त्र से  बच्चों  के नश्वर शरीर का स्पर्श न हो तब तक लगता नहीं था की आज माई बाबूजी  घर में हैं – एक अनुशासन था प्रभु।…

प्यार दुलार और मार जैसे शब्दों में तारतम्यता का भाव था। प्रभु तब  के प्रमोद, महेश, दिनेश आगे चलकर अपने अस्तित्व के लिए मेहनत करते थे। वो आज भी अपने बजूद को बचाये हैं। आज नकली दूध पीकर माँ बाप का नकली प्यार पाकर लौंडे नकली प्रिया,नकली सनी लियोनि, नकली आशाराम और रामाधीर सिंह न होंगे तो क्या होंगे प्रभु… हे अकारण करूणा वरुणालय देवकी नंदन…राधे के श्याम…इस नई वाली राधे मम्मी की कसम मुझ दीन हीन अधम का कोई दोष नहीं। ‘हे गिरधारी…हम तोहपे बलिहारी

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