मंटूआ-पिंकीया की असली प्रेम कहानी

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मंटूआ-पिंकीया

मौसम में हल्की नमी थी और हवा में बंसत की सुवास.आसमान में देखते ही मन उड़ने लगता था.मानों वो चिल्ला-चिल्ला के कह रहा हो.”अब जाड़ा जाने वाला है”.धरती पर सरसों के पीले पीले फूल खिल गए थे.आम महुआ और पीपल पर नए पत्ते आ रहे थे.पत्ते देखने में चिकने,सुंदर.खाने में गन्ने जैसे मीठे और सुगंधित लगते थे.

मटर,जौ चना और मंसूरी से सजे खेत को देखने पर यकीन हो जाता था कि कुदरत से बड़ा कलाकार कोई नहीं है.पुरवा के अंगड़ाई लेते ही बाबा बंसत और बाबा वेलेंटाइन का एक साथ धरती पर आगमन हो रहा था.किसानों के चेहरे पर उत्साह और लौंडों के चेहरे पर उम्मीदें जवां थीं.

फरवरी सोरह अपना इतिहास लिखने को बेताब था.देश उस समय  jaanu और jnu jnu के बीच जूझ रहा था. बुद्धिजीवी बनने की प्रक्रिया में लगे कुछ लोग वातानुकूलित न्यूज केबिन में बैठकर देशद्रोह और देशभक्ति पर बहस करने में तल्लीन थे.वहीं नेता बनने की प्रक्रिया में लगे कुछ राजनीति के खिलाड़ी सड़कों पर क्रान्ति क्रांति खेलने में. आठ से लेकर साठ साल तक के लोग शरीर में आक्सिसोटिन नामक हार्मोन के अचानक बढ़ जाने का प्रगाढ़ अनुभव कर रहे थे.इसलिए सिंगल डबल और डबल  वाले ट्रिपल होना चाहते थे.

जिस चिंटुआ को गाँव की स्वीटीया तक लाइन नहीं देती थी वो भी रात को सोते वक्त ये सोचने लगा था कि कोई आलिया भट्ट  रात को धीरे से आकर कान में कहेगी..”सोये नहीं नॉटी ब्वाय.? जिस सुखलाल अंकल के दांत और बाल भरी जवानी में धोखा देकर उन्हें सीनियर सिटीजन बना चुके थे..वो फेसबुक पर किसी षोडश वर्षीया एन्जेल रोजी को इनबॉक्स में समझाते थे कि “भगवान ने तुम्हें अपने हाथों से दीपावली की छुट्टी में बनाया है।”

इसी प्रेमपूर्ण,क्रान्ति पूर्ण और कामपूर्ण माहौल के बीच पूर्वांचल में बागी बलिया जिला के आखिरी छोर माने जाने वाले चाँद दियर नामक स्थान पर एक घटना हुई.हुआ यों कि एक मंटू नामक लड़के को पिंकी नाम की लड़की से प्यार हो गया.यों तो प्यार हो जाना कोई घटना नहीं ये तो दो दिलों का सटना है.लेकिन सटना भी कभी कभी बड़ी घटना हो जाता है.

इस सटना रूपी घटना को बताने से पहले आपको ये बता दें कि अगर आशिकों का वर्गीकरण किया जाता तो  मंटू और पिंकी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों में आते क्योंकि क्रेडिट और डेबिट कार्ड के दौर में ये सफेद कार्ड वाले लोग प्यार की खरीदारी में पीछे रह जाते।

क्योंकि इस स्मार्ट फोन के दौर में वो आज भी नोकिया का टार्च वाला मोबाइल रखतें हैं.होली में ही नया कपड़ा खरिदते हैं.बलिया से बनारस जाना उनके लिए पटाया और बैंकाक जाने जैसा है.प्रेमी से पार्क और मॉल की जगह खेत में ही मिलकर काम चला लेते हैं.मैकडोनाल्ड में पिज्जा और बर्गर की जगह गाँव के मेले में गुरही जिलेबी खाकर ही खुश हो जातें हैं.मंटुआ फौज में जाने के सपने देखता है और पिंकिया नर्स बनने की.whats app,facebook और 2g,3g उनके लिए किसी सपने जैसा है.आईफोन और गैलेक्सी तो किसी दैवीय लोक की चीजें लगतीं हैं।

जैसे-तैसे उस वीरान से  दियर में मोबाइल कनेंक्ट तो हो जाता है लेकिन कब छोड़ दे,ये धीरूभाई अम्बानी और सुनील भारती एक साथ मिलकर भी नही बता सकते तो बीएसएनएल की बातें करने से अच्छा है चाइनीज रेडियो सुन लिया जाय.उस समय  दुःख कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था.मुश्किल से 2 मिनट हाल-ए-दिल होता है तब तक नेटवर्क बैलेंस को कील करके टें-टें बोल देता है।.फिर उसके बाद जो फील होता है उसे कहने के लिए एक अलग से प्लास्टिक का दिल चाहिए.

मंटुआ ने कहीं अखबार में पढ़ लिया कि वेलेंटाइन बाबा आ चुके हैं.सो उसने फिजिक्स की कॉपी में न्यूटन के सेकेण्ड ला आफ मोशन के ठीक नीचे ही लिख दिया कि आठ तारीख को किस डे है.फिर टेडी डे और नाना प्रकार के डे इसलिए पिंकी को रोज फोन करना है.मंटूआ सुबह उठा.गाय को खिलाया.खेत से लेहना काट लाया.काटकर पढ़ने चला गया.शाम को दौड़ और दंड बैठक रियाज के बाद रेडियो खोला तो मुहम्मद रफ़ी और लता जी एक साथ गा रहे  थे.

रिमझिम के गीत सावन गाये…गाये…मीठी मीठी…”

बार बार  मीठी मीठी सुनकर उसे अपने स्वीटी की याद आई.पिंकी को फोन मिलाने लगा तो नेटवर्क गायब.फिर तो ऐसा लगा मानों इस सावन की रिमझिम फुहार में  जेठ की दुपहरिया तपा रही हो।एक बार लगा उसे कि अभी दौड़कर चला जाय अपनी प्राण प्यारी के पास.लेकिन नही  मंटुआ ने हिम्मत नही हारी और अगले दिन.अपनी करेजा अपनी सोना,मोना,जान को एक चिट्टी लिख मारी.और फेसबुक whatsapp 2g,3g को एक थप्पड़ भी। प्रेम पत्र कुछ यूँ था।

मेरी प्यारी पिंकी.

वेलेंटाइन बाबा के कसम.इ लभ लेटर मैं सरसों  के खेत से नहीं तुम्हारी मुहब्बत के टावर पर चढ़कर लिख रहा हूँ.डीह बाबा अउर काली माई के कसम आज तीन दिन से मोबाइल में टावरे नहीं पकड़ रहा था.ए पिंकी. खीसियाना मत मोहब्बत के दुश्मन खाली हमारे तुम्हारे बाउजी नहीं यूनिनार आ एयरसेल वालें भी हैं.

जब फोनवा नहीं मिलता है न रतिया को तो मनवा करता है कि सड़की पर दउड़-दउड़ कर जान दे दें.अरे इन सबको आशिक़ों के दुःख का क्या पता रे ?.हम चार किलो चावल बेच के नाइट फ्री वाला पैक डलवाये  थे.लेकिन हाय रे वेलेंटाइन.रोज डे निकस गया प्रपोज डे बीत गया आज टेडी डे चला गया..हम तुमको हलो भी नहीं कह पाये। कभी कभी तो मन तो करता है की चार काठा खेत बेचकर एक दुआर पर टावर लगवा लें..आ रात भर तुमसे इलू-इलू करें।

जानती हो आज रहल नही जा रहा था एकदम.मनवा एतना लभेरिया गया है कि एकदम बेचैनी लेस दिया था.इधर बाऊजी अलगे परसान किये हैं.माई अलगे नोकरी करने के लिए खिसिया रही है.कल आलू में दवाई छिड़कना है.मटर में पानी चलाना है.सांझी को गेंहू पीसवाना है नाही तो माई बेलना से मारके सब बेलनटाइन निकास देगी.

फेर चना के खेत घूमना है.ईख भी पेरा रहा था.गुड़ बन रहा था.एकदम तुम्हारी बातों जइसा मीठा.तुमको पता है जब जब सरसो का खेत देखता हूँ न तब तब तुम्हारी बहुते याद आती है.लगता है तुम हंसते हुए दौड़कर मेरे पास आ रही हो.मन करता है ये सरसों का फूल तोड़कर तुम्हारे जूड़े में लगा दूँ..आ जोर से कहूं…”आई लव यू पिंकी”.

अरे अब गरीब लड़के कहाँ से सौ रुपया का गुलाब खरीदेंगे ?.जानती हो.सुनों न..हवा एकदम फगुनहटा बह रही है मटर,चना जौ के पत्ते सरसरा रहे हैं…रहर और लेतरी आपस में बतिया रहे हैं…मन करता है खेत में ही तुम्हारा दुपट्टा बिछाकर सो जाऊं आ सीधे होली के बिहान उठूँ.बाकी तुम्हारे उस बाउजी के अमरिस पुरिया जइसन फेस देखकर ऐसा लगता है जैसे सरसो के खेत में साँड़ घुस आया हो.मनवे बीजूक जाता है।

छोड़ो..उस दिन तो बबीतवा के बियाह में तुम आई थी न..हम देखे थे..तुम केतना खुश थी.करिया सूट में एकदम गुलाब जामुन जैसा लग रही थी.तुमको पता है तुमको देखकर हम दू घण्टा नागिन  डांस किये थे.ए पिंकी अच्छे से रहना.अब तुम्हारा 18 से परीक्षा भी है.इसलिए नीमन से पढ़ना..बाकी हम खिड़की पर खड़े होकर नकल करवाने के लिये ज़िंदा हैं न.चिंता मत करना बस काका आ विद्या का गाइड खरीद लेना.

इ खाली तुम्हारे इंटर का परीक्षा नहीं पिंकी मेरे इश्क का इम्तेहान भी है.अकलेस भाई आ मोलायम सिंग के कसम कवन उड़ाका दल रोक लेगा रे सरवा नकल करने से.बाकी सब ठीके है…रात-दिन तुम्हारी याद आती है.मोबाइल का नेटवर्क अलगे परसान किया है.एकदम से पागल का हाल हो गया है.रहा नहीं जा रहा था.अब खेती का काम करके हमू जल्दी से दौड़ निकालेंगे तेरह को बनारस में भरती है.देखो बरम बाबा का आशीर्वाद रहा तो मलेटरी में भरती होकर तुमसे जल्दी बियाह करेंगे.

हम नहीं चाहते की तुम्हारा बियाह किसी दूसरे  से हो जाए और हमको तुम्हारे बियाह में रो रोकर पूड़ी पत्तल गिलास चलाना पड़े.अगले साल तुम्हारा बेटा मुझको मामा कहे.आई लभ जू रे पिंकी। .कल दू बजे मातादीन रा के टिबुल पर आ जाना.आई मिस यू..एगो गाना गाने का मन कर रहल है।

“ए हो ब्यूटी के खजाना

बाड़ू लभ लेटर के पाना

मनवा लागे नाहीं जबसे दीदार भइल बा

ए जान हो तोहरा से प्यार भइल बा।।

 

तुम्हारे पियार में हमेशा से पागल

मंटुआ

लभ लेटर मात्र 2 रुपिया के खर्च में कुछ दस मिनट के अंदर मंटू के हाथ से पिंकी के हाथ  में पहुंच गया.जैसा की आप जानतें हैं कि प्रेमियों के डाक मुंशी अपनी इस ततपरता और निष्ठा से भारतीय डाक व्यवस्था में अप्रतिम योगदान दे चुके हैं.लेकिन सरकार को उनकी कोई खोज खबर नहीं.इधर पिंकिया का हाल भी बेहाल होकर निहाल हो रहा था.

उसके बोर्ड एग्जाम शुरु होने वाले थे.और घर के सारे काम भी.घर से तभी निकलती थी जब बंसवार में गोबर पाथना होता था.घर के सारे काम निपटाने के बाद पढ़ना भी होता था.लेकिन सबसे बड़ा काम ये था की जब सब सो जाते हैं तो अपने दिलवर जानी मंटूआ को फोन करना होता था.फोन जब नहीं मिलता तो रो रो कर सो जाती थी.कल मंटू का खत पढ़ा तो थोड़ी उदासी कम हुई.खूब हंसी भी..रोइ भी.और मन ही मन मंटुआ को अपना दुलहा मानकर एक जबाबी खत लिख डाला.

मेरे जानेमन मंटू

तोहार लेटर आज मिला.का कहें.जबसे पढ़े हैं तबसे हमरो लभलाइटिस बढ़ गया है.आज दिलवा बोरसी जइसन सुनुग रहा.केतना बार दिल बनाकर उसमें तोहार नाम लिखे आ केतना बार तीर बनाकर मिटाये ,केतना बार रोये अरे यूनिनार वाले मिल जातें न तो उनके टावर में किरासन डाल के फूंक देती आ पूछती.”कवना जनम के बदला ले रहा है रे नीसतनिया “?

पता है जब खूब तोहसे बतियाने का करता है.आ मोबाइल में टावरे नहीं रहता है न तो मन करता है की सिलवट पर मोबाईल को धनिया के संगे पीस के तरकारी बना दें.हई वेलेन्टाइन का मुंह न मारो..काहें के किस डे आ रोज डे.टेडी डे.इहाँ हम तुमको देखने के लिए  तरस जा रहे हैं.अरे इ सब पईसा वाले लोगों का त्यौहार है.तुम हमको सिरात मेला में दस रुपया का गुरही जिलेबी खिया देना.हम समझ लेंगे की इहे हमरा वेलेंटाइन डे है.

सुनो माई बाबूजी का का बुरा मत माना करो.गारजिवंन जो कहेगा हमारे फायदे के लिए कहेगा..बुझाया न ?.आ सरसों चना गन्ना आलू पर धियान दिया करो.हम पर नहीं.वरना तुम्हारे डैनीया जइसन बाबूजी कहियो तुमको मार वार दिए तो हम रो रो के मर जायेंगे.पता है माई आज मामा इहाँ गई है.और भौजी का नया समाचार है.हम फुआ बन जाएंगे अब तो भौजी तनी आराम कर रही हैं आजकल.सब लोड हमरे पर आ गया  है.

मेरे मंटू हम बबीतवा के बियाह में तुमको देखे थे..अरे केतना दुबरा गए हो.खाते पीते नहीं हो का ?.पहिले केतना नीक लगते थे..एकदम..सनी देवला जईसा ..अब एकदम गाल  सुख के इमरान हासमी हो गया है.अरे मेरी चिंता जिन किया करो मेरे राजा ..हमको तो घर में रहना है कइसे भी रह जायेंगे।तुमको बाहर रहना है.मलेटरी में भरती होकर देश का रक्षा करना है …अच्छे से नहीं खाओगे तो  सीमा प का दुश्मन से लड़ोगे..?हम तो तुम्हारे चिंता में ही दुबरा  जायेंगे।

आज सुबह तुलसी जी को दिया बारे हैं.केला में जल दिए हैं.फेर कोहंडा चीरे के मसाला पीसे हैं.तरकारी बन गया है.गाई के लिए जनेरा का भात बनाना है.अउर पता है काल्ह रात को गइया खूब सुंदर बाछी दी है.आज दुआर पर पलानी छवा रहा है न तो बाबूजी ओहि में बीजी हैं.

सब काम हो गया.छत पर मरिचा के अँचार सुखाई.घर बहार के गोबर पाथने जा रहे थे तब तक तुम्हारा चिट्ठी मिला है.जबसे पढ़े तबसे किसी काम में मन नहीं लग रहा.कई बार रात को रो रोकर चुप हो जाते हैं.जाने दो.तुम अच्छे से रहना मेरे लिए.दो-चार दिन में भइया भी नवेडा से आने वाले हैं.हमारे लिए बोरो प्लस आ फ्राक सूट लाने को कहें हैं.

पता है मंटू हम एक दिन सपना देख रहे थे.तुम फौज में भरती हो गए हो..वर्दी में केतना नीक लग रहे हो..तुम्हारे आगे सब फिलिम के हीरो फेल है.मन करता है देर तक देखते रहें.हम खूब खुश हैं.तुम हमारे लिए हरियर चूड़ी आ लाल लाल बिंदी आ गुलाबी रंग का साड़ी लाये हो.हम पेहेन के खूब सुंदर लग रहे हैं एकदम मधुरीया जइसन।आ पता है अपने सब सखी से कहते हैं.हमार संइयां डाक्टर इंजीनियर ना हवन.

“हमार संइयां त हउवन जवान ए सखी 

उनका से बाटे इ देसवा के शान…

एतना नीक सपना था न की का बताएं.बीचे में  माई जगा दी.”अरे पिंकी कबले सूतबे.चल मसाला पीस.ए मंटू तुम हमारा सपना एक दिन जरूर पूरा करोगे मेरे राजा इहे उम्मीद है.आ सुनों.हम काका आ विद्या दूनु गाइड किन लिए हैं.तुम चिंता मत करना.अरे पेयार के परीक्षा में तो तुम बिना बैठे ही पास हो मेरे दिलवा के लालटेन.हाइस्कूल में देखे तुम हमको खिड़की पर एक चिट दिए.हम पांचवा के घ के जगह सातवां के क लिख दिए थे तब्बो पास हो गए न 80 नम्बर आया.अरे अकलेस जादो के सरकार में कोई फेल होता है पागल.इसलिए टेंसन मत लिया करो.मोलायम सिंग जिंदाबाद कहो.

बस जब जब किताब खोलते हैं न तब  तब तुम्हारी सांवली सुरतिया मन पड़ने लगता है…लगता है अब तुम किताब से झांक दोगे आ हमार आँख बन्द कर कहोगे…”आई लव यू पिंकी”

दिलवा एकदम कुहुक जाता है.मन करता है कि दीवाल तोड़कर तोहरा लग्गे आ जाएँ.बाकी माई बाउजी के मुंह सामने आ जाता है.जाने दो तुम मलेटरी में जल्दी भर्ती हो जावो.आ मुझे अपनी दुल्हन बनावो.बाकि सब ठीक है अपना खियाल रखना.हम मातादीन के टिबुल पर नहीं.बबीतवा के ओसारा में आयेंगे.आई लभ जू मेरे राजा। एक शायरी इयाद आ रहल है।

टूटी हुई सुई से कढ़ाई नहीं होती है

मंटू तेरे याद में पढ़ाई नहीं होती है।

 

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संगीत का छात्र,कलाकार ! लेकिन साहित्य,दर्शन में गहरी रूचि और सोशल मीडिया के साथ ने कब लेखक बना दिया पता न चला। लिखना मेरे लिए खुद से मिलने की कोशिश भर है। पहला उपन्यास चाँदपुर की चंदा बेस्टसेलर रहा है, जिसे साहित्य अकादमी ने युवा पुरस्कार दिया है। उपन्यास Amazon और flipkart पर उपलब्ध है. फ़िलहाल मुम्बई में फ़िल्मों के लिए लेखन।