घर की कहानी..पति-पत्नी,फेसबुक और वो..

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शहर में शर्मा जी के जूते की मशहूर दुकान है,मोहल्ले में खूब इज्जत-प्रतिष्ठा है, पांच साल पहले घर वालों ने उनकी शादी कर दी..शर्मा जी ऐसी दुल्हन पाकर बड़े खुश हुए..भला क्यों न हों? शरमाइन सुंदर,सभ्य,गृह कार्य दक्ष  के अलावा  हिंदी से एमए,बीएड हैं लेकिन हुआ क्या कि शादी बाद शर्मा जी ने  शरमाइन  को  कहीं बाहर  पढ़ने-पढ़ाने के लिए नहीं जाने दिया. क्योंकि  शर्मा जी का मानना था कि राम जी की कृपा से किसी चीज की कमी नहीं..तो बीबी को नौकरी करने की क्या जरूरत है..वो घर में रहे माँ-बाप की सेवा करें.
बस क्या था…शरमाइन अपनी सारी डिग्रियों को बक्से में रखकर किचन से लेकर बिस्तर और ससुराल से लेकर नइहर तक में सिमट गयीं..बहुत हुआ तो साल में एक बार वैष्णों जी के दर्शन करने सपरिवार चले गये.और घर आकर वही दिन-रात की गृहस्थी में भीड़ गये..शादी के डेढ़   साल बाद  बेटा हुआ.इस ख़ुशी में शर्मा जी ने इतना बड़ा दिव्य भंडारा  और चौकी तोड़ जागरण किया गया कि मोहल्ले भर में आज भी उसकी जय-जयकार होती है.

 

इधर बेटा बड़ा हो गया है..अब स्कूल जाने लगा है.लेकिन हमेशा खुश रहने वाले शर्मा जी बेचारे परेशान हैं.कल पता चला वो बाबू भाई के चाय की दूकान पर अपने एक खास मित्र से बड़े दर्द भरे अंदाज में बता रहे थे कि वो ‘शरमाइन से एकदम आजीज आ गयें हैं..एकदम परेशान हो गये हैं..समझ में नहीं आ रहा, करें तो क्या करें..?

पता चला है कि शरमाइन बेटे को स्कूल और शर्मा जी को दूकान भेजने  के बाद दिन भर फेसबुक चलातीं हैं..रोज चार बार डीपी और तीन बार कवर फ़ोटो चेंज करती है..नाना किसिम का मुंह चमकाकर सेल्फ़ी लेती हैं..
और तो और न जाने कवन सा भूत उनके कपार पर सवार हो गया है कि कविता-सविता और ग़ज़ल-शायरी भी लिखने लगी हैं.किचन में खाना बनाते समय हों या अखबार पढ़ते समय..हर छोटी-मोटी बात को उपलब्धि मान कर उसे फेसबुक पर शेयर करने लगीं हैं.यहां तक की उनकी हर चौथी बात में किसी न किसी उस फेसबुक फ्रेंड की बातें होती हैं..जो उन्हें सुबह-शाम बोल्ड,ब्युटीफूल,स्वीट और क्यूट लेडी बताता है.यहाँ तक की कभी किसी दिन शर्मा जी अचानक उठकर देखते हैं तो पाते हैं कि शर्माइन रात को 1 बजे  अपने स्मार्ट फोनवा में देखते हुये चवनीया मुस्की काट रहीं  हैं.

फिर क्या ? शर्मा जी का पारा हाई होता है..और वही होता है जो होना चाहिए..फोन तोड़ने से लेकर घर छोड़ने और नइहर जाने से लेकर जहर खाने तक की वही पारम्परिक बातें होती हैं..
थोड़े देर बाद शर्मा और शरमाईन  जी एक दूसरे के करेक्टर सार्टिफिकेट को खंगालते हैं…
“मैं ही थी जो आपके पास रह गयी’ और “तेरा बाप मुझको ठग लिया” जैसे अमृत वचनों का काव्यनुमा पाठ करते  हैं..और ठीक दस बजे शर्मा जी के दूकान जाते ही माहौल  एकदम शांत हो जाता है. और दो दिन बाद फिर वही स्क्रिप्ट,वही डायलॉग…वही झगड़ा.

कल तो मुझे समझ में नही आ रहा था की मैं शर्मा जी से क्या कहूँ.उनसे कैसे पूछूँ की शर्मा जी आपको शरमाईन के फेसबुक चलाने से बड़ी आपत्ति है..आप उनके कविता लिखने,गाना गाने और मोटी हो जाने  तक का मजाक उड़ाते हैं.
शादी के एक साल तक तो आप  इसी शरमाइन को बड़ी प्यार करते थे..उनके नइहर जाने के तीसरे दिन ही आप सांझ को दुकान बन्द करके ससुराल पहुंच जाते थे..आज क्या हो गया? महराज आपने तो बबुआ होने के बाद शरमाइन पर ध्यान ही देना बंद कर दिया.आजकल आप दूकान से आते हैं..खाना खाते हैं..बिस्तर पर जाते हैं..और अपना वो मतलब निकाल के सो जाते हैं.

शर्मा जी आपने 5 सालों में बीबी को भौतिक,शारीरिक और आर्थिक सुख तो खूब दिया है..शरीर का ख्याल तो रखा है लेकिन शरमाइन के आत्मा को खंगालने की कभी कोशिस ही नहीं की है.? झगड़ा होता है तो आप भूल जाते हैं..की अंतिम बार कब आपने शरमाइन से प्यार से बातें की थीं.उनका हाल-चाल पूछा था..कब किसी चीज  तारीफ़ की थी.आप तो जूता बेचने के चक्कर में ये भी भूल गये हैं की आपकी बीबी ने हिंदी से एमए किया है..और आप शायद  आप ये भी नहीं जानते हैं कि स्त्री सृजन की पर्याय है..रचनात्मकता उसके स्वभाव में है..रचे बिना वो रहेगी नहीं.

आज से कई दशक पहले जब सोशल मीडिया नहीं था तब यही कविताएं,यही कहानीयाँ,यही ग़ज़लें, सांझ-सवेरे  चूल्हें से उठने वाले धुएं में जलकर किसी बक्से में हमेशा के लिए बन्द हो जातीं थीं.और न जाने कितनी शरमाइनों के भीतर की एक कवियित्री, लेखिका, किचन से लेकर बिस्तर तक में दम तोड़ देतीं थीं.

आज सोशल मिडिया ने उन्हें बड़ा हथियार दिया है खुद को अभिव्यक्त करने का..आज वो साड़ी पहनकर पति के बताने का इंतजार नहीं करतीं की वो आफिस से आएँगे तो बतायेंगे की कैसी लग रही हो डार्लिंग”.

आज फेसबुक पर फ़ोटो डालते ही कमेंट बॉक्स से लेकर इनबॉक्स तक में हजारों सौंदर्य शास्त्र के महान विद्वान बैठे हुए हैं ये बताने को कि..”अद्भुत,अनुपम,दिव्य,..भगवान ने आपको दिवाली की छुट्टी में बनाया है..”आज वो डायरी लिखकर उसे छुपाकर नहीं रखतीं..की कोई पढ़ न ले.गीत-कविता लिखकर किस पत्रिका को भेजने का ख्याल नहीं करतीं..आज तो कविता को फेसबुक पर शेयर करते ही हजारों समीक्षक,आलोचक उसे सदी की महानतम कविता  साबित करने के लिए तैयार बैठे हैं.

और शर्मा जी ये भी  ट्रेजडी ही है…क्या आप बताएंगे कि आप जैसे देश के लाखों शरमा जी को शादी के दो चार साल बाद बगल वाली वर्मा जी की बीबी क्यों अच्छी लगने लगती है..आपने कभी सोचा है? नहीं सोचेंगे आप..पर इतना जरूर ध्यान रखिये की वर्मा जी को भी किसी दूसरे तिवारी जी की बीबी ज्यादा अच्छी लगती है.बस इसलिए की देश के लाखों शर्मा,वर्मा और तिवारी जी बीबी को मात्र एक शरीर ही समझते आए हैं…खाना बनाने और बच्चे पैदा करने की मशीन से ज्यादा कुछ समझा ही नहीं है।

और इसी समझ ने समूचे हिन्दुस्तान के  दाम्पत्य को भावनात्मक रूप से खोखला कर दिया है..अरे! मनुष्य के शरीर का ही ख्याल रखा जाए उसके भावनात्मक स्तर को बिसरा दिया जाए..तो वो बीमार पड़ जाएगा.आज हर दाम्पत्य  प्रेम के अभाव में बीमार है.फेसबुक ब्लॉग ने उस बिमारी को ठीक करने  में बड़ी भूमिका तो निभाई है लेकिन.उसने भयंकर विकृति को जन्म दे दिया है.आज लाखों शर्मा जी दूसरे वर्मा जी के बीबी के इनबॉक्स में कविताएँ लिख रहे हैं..और उनकी बीबियाँ किसी हैंडसम से राहुल,बंटी जैसे लौंडों के इनबॉक्स में..लेकिन  लाखों शर्मा जी और शरमाइन ये समझने को तैयार  नहीं की किसी  को इंटरनेट से दूर रखकर इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता.फेसबुक,ब्लॉग बन्द करने और फोन तोड़ने से इस बीमारी से निजात नहीं पाया जा सकता.

इसका एक ही समाधान है कि Husband Wife  को एक दूसरे की सृजनशीलता का सम्मान करना होगा..पत्नी अगर कविता लिखती है,गीत गाती है या कुछ रचती या बनाती है  तो उसकी तारीफ़ करने से आप दूबले नहीं हो जाएंगे..या पति आपके कुछ लिखते-पढ़ते हैं या गाते-बजाते हैं तो उनकी तारीफ़ से आपका मेकअप नहीं बिगड़ जाएगा..सच तो ये है कि वास्तविक अर्थों में उसी समय आप एक दूसरे के सबसे ज्यादा करीब होंगे.क्योंकि आदमी कुछ भी रचते वक्त स्वयं के  सबसे ज्यादा करीब होता है.पति-पत्नी को प्रेम के इस मनोविज्ञान को समझना होगा.वरना इंटरनेट दाम्पत्य तबाह करने के हजारों हथियार लेकर  तैयार बैठा है ।

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