Social Media का सार्थक उपयोग कैसे करें ?

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चार फिट सात इंच का सिंटूआ गाँव से पहली बार बनारस  पढ़ने के लिए आया था.कहतें हैं तब उसके चेहरे से मासूमियत की गंगा-जमुना बहती थी.दाढ़ी-मूंछें भी तो ठीक से नहीं आईं थीं.माँ ने इस इकलौते लड़के को हिदायत देकर बड़े अरमान से पढ़ने भेजा था.लेकिन ये क्या लौंडेपना में उसने जिद करके एक दिन अपने बाप से  Micromax का Smart Phone खरीदवा लिया.

फिर तो शुरू हुआ फेसबुक और What’s app का दौर..रिक्वेस्ट सेंड और एक्सेप्ट होने लगा.डीपी और कवर फ़ोटो रोज बदले जाने लगे.पिंकूआ-चिंटूआ से चैटिंग भी शुरू हो गयी.अगले दिन एन्जेल प्रिया के फ़ोटो को इतनी बार जूम किया कि रात को नींद भी गायब होने लगी.भले सिंटूआ माँ से तेज आवाज में और बाबूजी से सात दिन पर बात करे लेकिन फादर्स-मदर्स डे के दिन लम्बे-लम्बे स्टेटस इस अंदाज में शेयर करने लगा..मानों आज साक्षात श्रवण कुमार जी ने फेसबुक ज्वाइन कर लिया हो.

फिर हुई एक दुर्घटना.सिंटूआ को एक दिन एक एन्जेल प्रिया ने ऐसा ब्लॉक मारा कि उसका दिल टूटकर दुक्कड़ हो गया..सारे अरमान बाथरूम में बह गए.फ़ीर कुछ दिन बाद उसे और भी रोना आया जब  पता चला की वो एन्जेल प्रिया कोई लड़की नहीं, बल्कि उसके पड़ोस वाला करीमना नामक लौंडा है.हाय..! दुनिया से उसका भरोसा उसी दिन उठ गया..उसने खुद एन्जेल प्रिया बनकर कई फलाने-चिलाने के साथ अपनी फेसबुकिया बेवफाई का बदला लिया.ये दौर कुछ दिन ऐसे ही चला की अचानक उसे किसी ने एक दिन “दलित रक्षा स्वाभिमान मंच”  ग्रुप का एडमिन बना दिया.और ये समझा दिया कि तुम ही अब इस ग्रुप के मालिक हो.

कहतें हैं कि सिंटूआ को बात समझ में आ गयी.वो अपना फ़ोटो ग्रुप में डालने लगा.जहाँ पहले 30 लाइक मिलते थे वहां अब 100 लाइक मिलने लगे.सिंटूआ सारा समय ग्रुप को सम्भालने में खत्म होने लगा.दिन भर तमाम फेसबुकिया दलित क्रांतिकारियों को पढ़ने लगा.लेकिन साहेब अफ़सोस.कभी लाइक कमेंट से शुरू हुई Social Media लाइफ आज गाली-गलौज बहस,ब्लाक के बाद मार-पीट तक पहुंच गयी है.आज सिंटूआ का हाल ये है कि उसका अब कहीं बाहर मन नही लगता..न किसी से बात करने का मन करता है न कहीं घर से जाने का.न ठीक से कोई फ़िल्म देख पाता है न ही किताब पढ़ पाता है.

आज वो इतना  चिड़चिड़ा हो चुका है कि खाना खाते,किताब पढ़ते,बाथरूम करते एक हाथ में मोबाइल लिए रहता है.एक घण्टा इंटरनेट बन्द हो जाए तो उसकी साँस फूलने लगती है.रात भर नींद नहीं आती है.सुबह उठते ही पेशाब रोक के सबसे पहले नोटिफिक़ेशन चेक करता है.उसे लगता है अब दुनिया में कुछ रखा ही नही है.

फिर सुबह से लेकर साँझ तक ब्राह्मणवाद को गरियाता है..मनुवाद के ऐसी की तैसी करने की बातें करता है.अब वो सवर्णों को इस दुनिया से खत्म करके ही अंतिम साँस लेना चाहता है.क्योंकि उसने सोशल मिडिया के एक तथाकथित क्रांतिकारी को अपना आइडियल मान लिया है.

कहानी – 2

2012 का जून तप रहा था,जब कैलाश जी मास्टर साहब मास्टर नहीं रहे..रिटायरमेंट के बाद खाली समय का क्या हो सो बेटे ने फेसबुक अकाउंट बना दिया.कैलाश जी को एक नयी दुनिया से रू बरु होने का मौक़ा मिला..फेसबुक ज्वाइन करने के बाद उन्होंने जवानी में प्रेमा,श्यामा,रेखा के नाम लिखी जाने वाली कविताएँ खूब शेयर कीं…कई बचपन के बिछड़े दोस्तों-सहेली और प्रेमिकाओं से यहीं आकर मुलाकातें हुईं…कई बार एन्जेल प्रिया के चक्कर में गुड़ मार्निंग,गुड नाइट भी होने लगा.

लेकिन ये क्या.2014 में लोकसभा चुनाव हुआ.मोदी पीएम बने..उसके बाद तो कैलाश जी  जहाँ,ग़ज़ल,गीत,संगीत और दुनियादारी  के तमाम अनुभव  मित्रों से साझा करते थे..वो अब हर दूसरे स्टेटस में मोदी को कोसते नज़र आतें हैं..हर पल उन्हें देश में आपातकाल नज़र आता है.जो उनसे असहमत होता है उन्हें रोज ब्लॉक करतें हैं. हफ्ते में दो बार फ्रेंड लिस्ट साफ करने और महीने में चार बार फेसबुक छोड़ने की धमकी देते हैं.

आदरणीय मित्रों.कहानी तो खतम हो गयी.लेकिन.रुकिए जरा.ये दो कहानीयाँ सिर्फ कैलाश जी और किसी सिंटूआ की कहानीयाँ नही हैं ? आप अपनी फ्रेंडलिस्ट में नज़र दौड़ाएंगे तो भारी मात्रा में ऐसे कैलाश जी और सिंटूआ दिख जाएंगे.जो दिन भर फेसबुक,ट्विटर पर दुनिया बदलते-बदलते,क्रान्ति करते-करते खुद बदलकर बीमार हो गए हैं.और मजे की बात ये है कि उनको पता ही नहीं कि वो बीमार हैं.

क्योंकि इस रोग का अभी कोई साफ लक्षण नहीं समझ में आया है.न ही बीमार हो जाने पर Medical Insurance की व्यवस्था किसी Insurance Company ने कर रखी है..कोई डाक्टर भी तो नहीं बता पाएगा की आदमी इस Facebook,Twitter,पर आके कुछ दिन बाद बीमार कैसे हो जाता है.लेकिन जरा सी जागरूकता से हम इस बीमारी से निजात पा सकतें हैं.

बस जरा Social Media के जितने प्लेटफार्म हैं उनका व्यवहार जरा बारीकी से समझ लेना जरूरी है.आपको रोग कारण,निवारण आसानी से समझ में आ जाएगा.

क्या आप जानतें हैं कि Google,Facebook,Twitter,You Tube आपसे हमसे कहीं ज्यादा तेज है.?

क्या आप जानतें हैं कि हमारी-आपकी एक-एक एक्टिविटी पर इन सबकी नज़र है..?आपके घर वाले माँ-बाप या बीबी-बच्चे भले न जानें कि आपको क्या अच्छा लगता है..लेकिन इन सबको इतना तक पता है कि आपको कब,किस समय क्या अच्छा लगता है.

क्या आपने महसूस किया है कि आपकी फ्रेंडलिस्ट में 1 हजार फ्रेंड तो हैं लेकिन सबके स्टेट्स आप नही पढ़ पाते..?आपने Twitter पर 5 सौ लोगों को फॉलो तो किया है  लेकिन सबके Tweet आपको नहीं दिखतें हैं..आपने YouTube पर सैकड़ो चैनल Subscribe तो कर रखा हैं.लेकिन आपको सबके विडिओ नही दीखते,अलबत्ता किसी और चैनल के वीडियो आपके YouTube Home  में छाए रहते हैं.

आपको पता है ऐसा क्यों होता है ?क्योंकि आपने आज तक उन एक हजार फेसबुक मित्रों में से कुछ ही मित्रों को पसन्द किया है…आज तक कुछ ही के ट्वीट आपने लाइक किया है..एक ही टाइप के वीडियो आपने हमेशा  देखा है..बस यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है.. आपको पता नही Facebook,Twitter,Youtube के Robot इतने तेज और होशियार हैं कि ये  जान जातें  है कि इस  आदमी की पसन्द बस यही है.अच्छा..अब जरा और आगे आइये.

मान लीजिये आज सुबह आपके किसी फेसबुक फ्रेंड ने डीपी बदली..आपने लाइक किया.फिर आपने कमेंट टाइप किया.” Nice यार तुम्हारा Shoes बड़ा जम रहा.कहाँ से लिया उधर से आपके ड्यूड ने रिप्लाई किया.”Online मंगाया था यार ” इस बातचीत के बाद आपको पता है क्या होगा.? आप जब नेक्स्ट टाइम फेसबुक खोलेंगे तो आपकी टाइमलाइन Amazon और Flipkart के जूतों  से सजी हुई मिलेगी.

आप आश्चर्य में हो जाएंगे.और मुंह से निकलेगा अरे ! “इसे कैसे मालूम हो गया की मुझे जूता चाहिए.” ?
मैंने कहा न की आप सोच भी नहीं सकते.उससे कहीं ज्यादा ये सब आपकी पसन्द,नापसंद का ख्याल रखतें हैं.और आपको वैसा ही पोस्ट,वैसा ही पेज,वैसा ही वीडियो,ग्रुप,सेलिब्रेटी,सामान हमेशा सजेस्ट करते रहते हैं.

 

इधर 2014 के बाद तो सोशल मिडिया का स्वरूप और भी तेजी से विकृत हुआ है..जहाँ पहले सोशल मीडिया एक दूजे से कनेक्ट करने,बधाई,शुभकामना देने,और गाँव-देहात में सिर्फ मुफ़्त में बात करने का माध्यम भर था..वो मोदी उदय के बाद एकदम बदल चुका है.अब यहाँ अपनी राजनितिक,सामाजिक और मार्केटिंग गोल सेट किया जाने लगा है.

सभी पार्टी,कम्पनी,प्रोडक्ट की अपनी सोशल मीडिया टीम है..सभी ने सोशल मीडिया के लिए सालाना बजट की अच्छी खासी व्यवस्था कर रखी है..अब Employment News खोल के देखिये आपको Social Media Strategist की नौकरी के विज्ञापन आकर्षक सैलरी के साथ दिख जाएंगे. ये Strategist हर जगह फैले हुए हैं.जो अपनी मार्केटिंग के लिए आपकी मासूमियत का फायदा उठाकर आपको अपना सामान,अपना विचार बेचने के चक्कर में बीमार कर रहे हैं.

बस यही उपाय है कि आपको किसी के विचार अच्छे लगें.तो उसकी दो-चार पोस्ट और भी  पढ़ें..पूरी तरह सहमत हो जाएं तभी किसी को लाइक करें.ये भी जानें कि हर विचारधारा में अच्छे और सुलझे लोग होते ही हैं..उनकी भी एक लिस्ट बनाएं..एक लिस्ट बनाएं उन लोगों की भी, जिनको आप बहुत पसन्द करतें हैं..उनको सी फर्स्ट में रखें..एक लिस्ट उनकी भी बनाएं.जिनसे आप अधिकांश मौकों पर सहमत तो नहीं होते लेकिन उनको पढ़ना आपको अच्छा लगता है.कुछ अच्छे Inspirational पेज,संगीत,साहित्य,कथा,कहानी,फ़िल्म के पेज को भी see first में रखें..समय-समय पर इनकी भी चर्चा करें..क्योंकि जीवन सिर्फ राजनीति और क्रान्ति नहीं है.

इससे होगा क्या की आपकी टाइमलाइन में विविधता बनी रहेगी.आप बैलेंस में रहेंगे.आपके मन में उठने वाले विचारों में हमेशा एक सन्तुलन बना रहेगा..फिर उससे जो फिल्टर होकर आएगा वो आपकी आत्मा की अपनी आवाज होगी.नहीं तो साहेब आपको बीमार करने के लाख जतन यहां किये जा रहे हैं.एक बार फिर चुनाव कपार पर है.सोशल मीडिया के साइबर योद्धा तैयार हैं.आज जिस मुलायम सिंग के लिए मोदी समर्थकों को गरिया रहे हैं.मोदी के लिए लालू को गरिया रहे हैं.वो मुलायम सिंह कल नितीश कुमार की तरह मोदी को गले लगाते दिख जाएंगे.या मोदी जी लालू से हंसकर बतियाते मिल जाएंगे.लेकिन इनके चक्कर में आप खा-मख़ाँ किसी से जीवन भर के लिए दुश्मनी कर लेंगे.

अफसोस की आप जिसके लिए लड़ रहे हैं  उनसे भी नहीं सीखा की आदर्श विरोध कैसे किया जाता है..
अफ़सोस की आप ये भी नहीं जानते की कुछ भी ज्यादा हो जाना खुद से दुश्मनी कर लेने जैसा  है..ज्यादा हिन्दू,ज्यादा मुसलमान,ज्यादा दलित,ज्यादा भाजपाई,सपाई,बसपाई या कुछ भी.आप जब कुछ भी ज्यादा होते  हैं..अपने अस्तित्व से उसी वक्त उखड़ जातें हैं.

आपने कभी सोचा की किसी खूबसूरत बगीचे में आप जाएं और वहाँ एक ही किस्म के फूल हों तो कैसा लगेगा..? एक ही किस्म की सब्जियां रहें तो..? social Media  भी वही खूबसूरत बगीचा है..जिसको तरह-तरह के फूलों से सजाना जरूरी है..ताकि एकरसता न बनकर एक वो विविधता बनी रहे जो हमें बीमार होने से बचाए..

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