“कराही में घीव लेखा जीव जरsता !”

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ए जी पिंटूआ के पापा….!

ई कवन नोकरी ह जी कि ना रउरा दीवाली के छुट्टी मिलsता,ना छठ के रिज़रवेशन मिलsता ?

देख लीं, टोला में पंकजवा के पापा पंजाब से आ गइलें। बबलुआ के बाबूजी बंगलोर से गाड़ी ध लेले बाड़ें।

मनूआ के माई के त बागे नइखे रोकात ! सुबेरही से काजर लगा के चार हाथ फानsतीया! अउरी अमरीश पुरीया लेखा मुँह ना रहित त केहू के जिए ना दीत।

लेकिन जा रे हमार करम ! का जानें कवन मंगधोवनीं राउर मती मरले बिया की जहिया से रउरा सूरत रहे लगनीं तहिया से राउर सूरत देखे खातिर हम छछन के रही जातानीं।

अब बताईं ? काल्ह जब सबके सवांग पियरी पहिन के दउरा लेके छठ घाटे जाई,त हम कवना मुंह से कहब की पिंटूआ के पापा के रिजरवेशन ना मिलल ह..!

अरे! अरकी ऊपर रउरे नोकरी करsतानी की अउरी दुनिया में लोग नोकरी करे गइल बा ? लेकिन रउरा हमार दुःख कइसे बुझाई ?

आज खाली एगो राउर रिज़रवेशन ना मिलला से घर के मए सिचुएशन गड़बड़ाइल बा।

अब त बुझात नइखे की अकेले हम गेंहू धोईं की घर-दुआर साफ़ करीं? सूप,डलिया,दिया,दीयारी,फल कीनीं कि चूल्हा प बइठ के परसादी बनाईं ?

ना एगो साड़ी में फॉल लागल बा ! ना ही एगो साफ़-सुथरा शाल बा कि सबेरे ओढ़ी के अरघ लेब!

हेने एगो राउर माई बाड़ी । कतनो नीक से बोलs बारहों महीना कोंहड़ा लेखा मुंह लटकले रहेला!

अउर रउरा बहिन के रहन के त भगवाने मालिक बाड़े ! दिन भर मुंह चमका-चमका के हुआटसेप चलावsतारी..तनी एगो गिलास धोए के कही दs त सुथनी लेखा मुंह बना जाता…का जाने कवना देशे जइहन !

अरे! कराही में घीव लेखा हमार जीव जरताs ! अइसन सास-ननद भगवान सात घर मुदइयो के मत देस!

बस हमरे लेखा मेहरारु बिया त एह घर में टीकल बिया। ना त दोसर रहित तs नौ बजिया पकड़ के बिहाने नइहर भाग जाइत..

लेकिन जाएं दीं…!

बड़ी-भाग संजोग से छठी माई बरिष-बरिष के दिन देखावेली। एही से ढ़ेर ना कहब ! बस छठ के परसादी हमरा मुँह में कइसे जाई,इहे सोच-सोच के मन दुकइसन हो जाताs।

लेकिन अब घरवो बइठला से त काम ना चली! गाँव में बा कुछु… मए त बाढ़ में बही गइल बा!

बस छठी माई से इहे निहोरा बा की रउरा सूरत रहीं चाहें लोधियाना रहीं..सिंगल ड्यूटी करीं चाहें डबल ड्यूटी करीं…छठी माई हमार सोहाग बनवले राखस! अब पूते-भतार ठीक से ना रही त छठ आ जीऊतिया करके हम का करब!

एही से निहोरा बा की आपन खियाल राखब !

अउर फगुआ में पसिंजर में रिजर्वेशन मिले चाहें माल गाड़ी में,राई मन से चली आईब ! ना त इयाद राख़ब, सूरत आके राउर सूरत बिगाड़त हमरा देर ना लागी।

राउर

पिंटुआ के माई!
रानीगंज बैरिया जिला बलिया

©- atulkumarrai.com

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