आवो सुनाएं प्यार की एक कहानी….
जुलाई 15.यानी एडमिशन,हॉस्टल एलाटमेंन्ट और फिर इस कमरे से उस फ्लैट,उस फ़्लैट से इस हॉस्टल की मारामारी..फलाना माइग्रेशन तो चिलाना आय से लेकर ढिमकाना निवास की दौड़-भाग.दिन भर की उमस के बाद उस दिन...
संगीता के आशिकों की कहानी
कभी पता चला कि गाँव के परमेसरा की छोटकी साली गर्मी की छुट्टी में अपने बहिन के यहाँ आ गयी है।बस गाँव के सभी मजनुओं में जीजा बनने की होड़ लग जाती थी।
इधर गाँव...
सावन को आने दो तुझे..
सावन का इंतजार बेसब्री से है.का लइका का जवान.भइया से लेकर भौजी तक.अम्मा से लेकर बाउजी तक.मजदूर से लेकर किसान तक.
रामसुधी परसान हैं कि अब बरखा बरसेगा तो गाय कहाँ बांधेंगे.?.एक मड़ई छाना पड़ेगा...
मंटुआ का वायरल लव लेटर-‘मेरी प्यारी पिंकी
मेरी प्यारी पिंकी
वेलेंटाइन बाबा के कसम.इ लभ लेटर मैं सरसों के खेत में नहीं तुम्हारी मुहब्बत के टावर पर चढ़कर लिख रहा हूँ...डीह बाबा काली माई के कसम आज तीन दिन से मोबाइल में...
एक पप्पू की प्रेम कथा (मेला स्पेशल )
आज प्यार भले फेसबुक से पैदा होकर whtas app पर जवान हो जाय..
लेकिन किसी जमाने में कालेज के सामने वाली चाट की दूकान से शुरू होकर दशहरा के मेला वाली जलेबी की दुकान पर...
एक हसीना सोलह आशिक
रोजी बीटेक करने नोएडा क्या चली गयी कई लौंडे भरी जवानी में विधवा हो गये.दिल का सुहाग ऐसा उजड़ा कि परदीपवा एयरफोर्स में भर्ती होकर अब पापा बनने वाला है.चनमनवा टीडी कालेज में नेता...
आनलाइन लव बनाम लव लेटर वाला प्रेम युग ( वायरल पोस्ट )
"खत लिखता हूँ खून से स्याही न समझना
आपसे करता हूँ प्यार बेवफाई न समझना"
इस love internet युग में जिस दिन प्रेम पत्र लेखन भी कविता,कहानी संस्मरण,डायरी और रिपोतार्ज कि तरह साहित्य की विधा घोषित...
बनारस प्रेम कथा ( वायरल पोस्ट )
कार्तिक पूर्णिमा से तीन दिन पहिले शाम का समय...गंगा आरती की तैयारी..पर्यटकों और नाव वालों में पैसे को लेकर बहस..पानी का श्रृंगार करतीं नावें...घाट के बसिंदों में देव दीपावली का अलग जोश..दसास्वमेध से दाहिने...
चनमन बाबू की चउचक Love Story
तीन सौ साल नहीं..बात आज से तीन साल पहले की है. उस समय सहिष्णुता अपने उच्चतम स्तर को क्रास करने के लिए मचल रही थी..समाजवाद फफा कर पसर रहा था...वामपंथ में दक्षिणपंथ ऐसे घुस...
वो इश्क का लैंडलाइन युग ( वायरल पोस्ट )
बहुत दिन पहले की बात है भी ,नहीं भी....तब लोग phone पर इतने झूठ न बोलते थे...बनारस रहते तो बनारस ही बताते,मुगलसराय नहीं..एक रुपया का समोसा और एक रुपया का चाय मिल जाता था...बुनी...
















