विश्वनाथ धाम : अतीत की नींव पर भविष्य की काशी
काशी विश्वनाथ धाम शुरू हुआ। कुछ मंदिर और घर क्या टूटे,मैनें देखा कि उन लोगों नें हर-हर महादेव कहकर चूड़ियाँ तोड़ लीं,जिनका धर्म नामक शब्द से मुकदमा चलता है।
बनारसी व्यंजन – पेश हौ नजारा…बहुते करारा
सुबह के सात बजे थे,भीड़ का बढ़ना जारी था, शिवालयों से हर-हर महादेव की ध्वनि उठ रही थी। गलियों से निकलता भक्तों का रेला,तुलसी,बेल पत्र और जल लेकर दौड़ रहा था।
इधर विदेशी इस लम्हे...
वाराणसी में रुकने के लिए सस्ते और बेहतरीन ठिकानें
भारत जब रियासतों में बंटा था,जब राजा-महाराजा और नबाब हुआ करते थे,तब न tripadviser का जमाना था,न ही कमरा बुक करने के लिए oyo rooms का ठिकाना।
उस समय इन राजाओं और नबाबों नें भारत...
Varanasi Travel Guide – एक दिन में पूरा बनारस कैसे घूमें ?
बनारस बस एक शहर नहीं है,बनारस हमारी सनातन संस्कृति की वो सुगंधित धूप है,जिसके आध्यात्मिक महक ने समूची दुनिया को बार-बार अपने मोह पाश में बाँधा है।
गिनती नहीं कि बनारस पर कितनी कविताएं लिखीं...
बाप को इतना मुलायम नही होना चाहिए
वो 1 जनवरी 2017 की सुबह थी.आसमान कोहरे से भरा था और लोगों के दिल नयी उम्मीदों से.रोज घण्टा घड़ियाल और सूर्य नमस्कार के मन्त्रों से गुलज़ार रहने वाला अस्सी घाट नए वर्ष की...
एक नकली आम आदमी का असली बयान
अस्सी की सांझ..बारिश के कारण सड़कों पर बने गड्ढों में भरा पानी स्मार्ट सिटी और क्योटो जैसे शब्दों को मुँह चिढ़ाता है तो एक बार मोदी जी से मन की बात करने का मन...
लन्दन की जेनी,क्रिस गेल और बनारसी लंठ
बड़ी गर्मी है..पारा 40 के ऊपर जाने को बेकरार है..माथे पर पसीना..सड़क पर भीड़..गलियों में गहमा-गहमी.
हर घर में घँटीयां टनटना रही हैं..कहीं शंख बज रहा..तो कहीं पाठ शुरू हो गया..तो कहीं पंडी जी नहीं...
इश्क में बनारस होना
सुनों..
कल अपने बनारस आ गया...आते ही लगा लौट आया हूँ तुममें और तुम मुझ में..गोदोलिया,जंगमबाड़ी और अगस्तकुण्ड ने बांहे फैला दीं थीं.बिल्कुल तुम्हारी तरह....मानों वर्षों बाद उसका महबूब घर लौट आया हो...जानती हो लौटकर...















