भारत के महान आदर्शों को नष्ट करती इस नकली बौद्धिकता को जानिए
वो कोई चैत की बेचैन सी सांझ थी जब मैं एक दरबेनुमा चाय की दुकान में जेनी से मिला था..तब रोज मुझे दसास्वमेध घाट की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में तबला संगति करनी होती...
एक नास्तिक की मन्दिर यात्रा
मेरे एक प्रिय मित्र हैं ..मने बहुते पढ़ाकू.तेजू खान के नाना टाइप.अपने विषय के विद्वान..अभी बीएचयू में पढ़ते हैं, जेएनयू सपना है उनका.जरूरत से ज्यादा बुद्धिजीवी हैं ..ज्ञान का बोझ सर पर लादे रहते...









