Jiddu Krishnamurti ने कहा..मैं शिष्य गण चाहता ही नहीं..जिस क्षण आपने किसी व्यक्ति का अनुयायी बनना स्वीकार किया उसी समय आपने सत्य का अनुगमन करना छोड़ दिया.आगे कहते हैं. कि सत्य एक पथहीन भूमि है..और उसके पास आप किसी मार्ग से,धर्म या पंथ से पहुंच नहीं सकेंगे,सत्य संगठित नहीं किया जा सकता,न कोई संगठन लोगों को जबरदस्ती से किसी विशिष्ट पथ पर चलाने के लिए निर्माण किया जाए,..सत्य को नीचे नहीं उतारा जा सकता,उसके बदले व्यक्ति को ही उस उंचाई तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिएं...आइये अध्यात्म की ओर सीरिज में हम मिलते हैं भारत के उस महान दार्शनिक JIDDU Krishnamurti और उनके महान वचनों से जो हमें स्वयं की खोज में अवश्य सहायक होंगे