बॉम्बे से चिट्ठी बनारस के नाम !
गुरु,तुमने आज हाल-चाल पूछा है। पूछा है, "कहो कैसे हो बम्बइया बाबू ? कइसा लग रहा है बम्बई में,याद नहीं आती न अब बनारस की ?"
बिरला हॉस्टल की होली : स्मृतियों के चटक रंग
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मेरा वो पहला साल था। खपरैल और टीन शेड के स्कूल से निकलकर एक केंद्रीय विश्वविद्यालय का छात्र होने की प्रसन्नता मेरी आंखों में उसी मात्रा में चमक...
छोटे शहरों की स्मृतियाँ ही हमारी संचित निधियां हैं।
पंजाब में सिक्ख भाई सरदार कहे जाते होंगे लेकिन अपने रज़ा बनारस में जादो जी लोग सरदार कहे जातें हैं। क्यों कहे जाते हैं ? इस परम्परा के पीछे जाएंगे तो आपको...
विश्वनाथ धाम : अतीत की नींव पर भविष्य की काशी
काशी विश्वनाथ धाम शुरू हुआ। कुछ मंदिर और घर क्या टूटे,मैनें देखा कि उन लोगों नें हर-हर महादेव कहकर चूड़ियाँ तोड़ लीं,जिनका धर्म नामक शब्द से मुकदमा चलता है।
एक प्राचीन देश की यात्रा
इधर ज़िन्दगी की रेल महीनों से बेपटरी हो चुकी है। समझ नहीं आता कि हॉल्ट कहाँ है और जंक्शन कहाँ..उतरना कहाँ है और चढ़ना कहाँ ?
आज आगरा से...
‘को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ’ ( कुम्भ यात्रा संस्मरण )
ट्रेन खुली तो हल्की बारिश हो गई,अचानक ठंड बढ़ गई। घड़ी में देख रहा रात दो बजने को हैं। ट्रेन में बैठे आधे लोग ऊंघ रहें हैं,आधे लोग टकटकी लगाए पूछ लेते...
काशी में शिव बारात – परम्परा और मस्ती का आध्यात्मिक राग
जब फागुन कपार पर सवार है और देश-दुनिया में वेलेंटाइन का खुमार..बुढ्ढों में इश्क और जवानों में प्रेम का बुखार है,ठीक उसी समय हमारी काशी सज-संवरकर तैयार है.लेकिन भाई मेरे- उसका कारण...
बनारसी व्यंजन – पेश हौ नजारा…बहुते करारा
सुबह के सात बजे थे,भीड़ का बढ़ना जारी था, शिवालयों से हर-हर महादेव की ध्वनि उठ रही थी। गलियों से निकलता भक्तों का रेला,तुलसी,बेल पत्र और जल लेकर दौड़ रहा था।
इधर विदेशी इस लम्हे...
वाराणसी में रुकने के लिए सस्ते और बेहतरीन ठिकानें
भारत जब रियासतों में बंटा था,जब राजा-महाराजा और नबाब हुआ करते थे,तब न tripadviser का जमाना था,न ही कमरा बुक करने के लिए oyo rooms का ठिकाना।
उस समय इन राजाओं और नबाबों नें भारत...
Varanasi Travel Guide – एक दिन में पूरा बनारस कैसे घूमें ?
बनारस बस एक शहर नहीं है,बनारस हमारी सनातन संस्कृति की वो सुगंधित धूप है,जिसके आध्यात्मिक महक ने समूची दुनिया को बार-बार अपने मोह पाश में बाँधा है।
गिनती नहीं कि बनारस पर कितनी कविताएं लिखीं...

















