सोसायटी का लोकतंत्र और कुत्ता राजनीति : एक हास्य कथा
सोसायटी अध्यक्ष एक रिटायर्ड अफ़सर थे और जीवन के खाली दिनों में लेखक बन चुके थे। उन्होंने सोसायटी कमेटी ग्रुप में एक डिजिटल सूचना लिखी थी, जिसका मजमून कुछ यूं था,
डोपामाइन डिटॉक्स – डिजिटल जंगल की आयुर्वेदिक जड़ी !
जिन चीज़ों को करने से हमारी खुशियों के व्याकरण की परिभाषा तय होती हो, एक वक़्त के बाद वही चीजें ज़िंदगी की स्लेट पर धुंधली पड़ने लगती हैं और फिर मन उचट...
ये दूर रहकर भी एक दूसरे के साथ खड़े होने का समय है।
जिस आदेश में एक अफ़वाह के आधार पर लोग नमक इकट्ठा करनें लगें, जगह-जगह अनाज और सब्जियों की जमाखोरी होने लगे,वहाँ कुछ लोग चाहते थे कि प्रधानमंत्री नें टीवी पर आकर देश...
फेसबुक एकाउंट हैक होने से कैसे बचाएँ ?
हर चौथे दिन फेसबुक पर एक सनसनाती हुई पोस्ट आती है,जिसमें पोस्ट करने वाला "हाय! लूट गए बर्बाद हो गए" टाइप मिज़ाज में आकर ये बताता है कि "पता न कौन कमबख्त मेरी फेसबुक...
Social Media Addiction – आभासी इश्क के खतरे जानिए
कल फेसबुक खोलते ही देखा कि हमारे किशोरीलाल अंकल जी का चेहरा शाहरुख खान से मिल गया है और वो ऊंचास लोगों को टैग करके इस उपलब्धि का लहरिया कट में जश्न मना रहे...
WhatsApp हमें क्या सिखाता है ?
सपनों में उलझी है जिंदगी.हम सुलझा रहे हैं दिन-रात...आ रहे हैं,जा रहे हैं,भाग रहे हैं,जाग रहे हैं.कुछ देर बाद सुलझन की एक डोर में पकड़ आती भी है तो कम्बख्त एक दूसरी उलझन सामने ...
हमने देश के लिए क्या किया साहेब
कल से मोहल्ले के एक ड्यूड क्रांतिकारी फेसबुक पर बवाल काट दिए हैं.कल जहाँ सब लोग सुबह उठकर तिरंगे झंडे के साथ गणतंत्र दिवस मना रहे थे.?वहीं वो शरद पवार का फ़ोटो डालकर पूछ...
Social Media का सार्थक उपयोग कैसे करें ?
चार फिट सात इंच का सिंटूआ गाँव से पहली बार बनारस पढ़ने के लिए आया था.कहतें हैं तब उसके चेहरे से मासूमियत की गंगा-जमुना बहती थी.दाढ़ी-मूंछें भी तो ठीक से नहीं आईं थीं.माँ ने...
एक कलाकार का असली धर्म क्या है ?
बात बहुत साल पहले की है... तब कलाबाज़ी नहीं कलाकारी का दौर था..कहतें हैं तब भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की लोकप्रियता आसमान छू रही थी...बलिया से बंगाल तक और गुवाहाटी से गोपालगंज तक ...
निरहुआ बनाम शहाबुद्दीन और लोकप्रियता का मनोविज्ञान
भोजपुरी में एक फ़िल्म आई.."निरहुआ रिक्शा वाला" कहते हैं जिस दिन बनारस में रिलीज हुई उस दिन बनारस में रिक्शा वालों के भाव जेट एयरवेज के भाव को टक्कर दे रहे थे...होता क्या था...

















