स्मृतियों में बाबूजी :
और तब मेरी धड़कन रुक जाती,जब बाबूजी बताते कि एक रात वो जब वो मकई के खेतों में अकेले सोए थे। आसमान चटक चाँदनी से नहाया हुआ था। हवा सनसना रही थी।...
रुकना जरूरी क्यों है ?
चलना एक कला है और रुकना भी। लेकिन ये भौतिकतावादी समय हमसे कह रहा है कि भागो,भागो नहीं तो तुम पीछे छूट जावोगे। दिन-रात मोटिवेशनल स्पीकर चिल्ला रहे हैं,"अरे,तुम यही हो। वो...
भोजपुरी संगीत अश्लील क्यों है ? ( इतिहास और वर्तमान पर एक नज़र )
वो साठ का दशक था,तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे। ले-देकर दशहरा के समय दरभंगा और अयोध्या से आने वाली रामलीला मण्डली का आसरा था। कहीं से...
कैम्पस एक बगीचा है,जिसमें हमें सींचा जाता है..!
कॉलेज का पहला दिन ! आसमान में धूप और बादलों की जंग जारी है,लेकिन इधर तो खुशी बिन बादल के बरस रही है।
एक देहात के स्कूल से पहली...
वर्चुअल और रियल वर्ल्ड की बैलेंसिंग समय की मांग
यही सर्दी की एक साँझ थी। घड़ी साढ़े पाँच बजा रही थी। चाय की दुकानों पर भीड़ का उमड़ना जारी था। तमाम लोग टकटकी लगाए चूल्हे की तरफ़ देख रहे थे तो...
पता नहीं जी कौन सा नशा करता है ?
पुराने ज़माने की महबूबा को पता रहता था कि एक दिन मेरी शादी अगर किसी सरकारी नौकरी वाले से हो गई तो मेरा ये भोला आशिक़ बहुत करेगा तो सिगरेट पीना छोड़कर...
एक परिचय की मौत
साल दो हजार नौ-दस का समय। खेत में बैठकर मेरी आँखें बीएचयू में पढ़ने का ख़्वाब बुन रहीं थीं।
तब ज़िंदगी इतनी ऑनलाइन न थी। यहाँ तक कि परीक्षा...
कोई पॉजिटिव समाचार है ?
सांझ हो रही है। रक्तिम प्रकाश से भरे आसमान का सूरज डूब रहा है। पुरूवा बहती है। डैने पसारे पक्षी अपने-अपने घोसलें को लौटतें हैं। एक किलोमीटर दूर पर विराजमान बाबा छितेश्वरनाथ...
‘डिजिटल बारूद’ के साथ खेलती मॉडर्न जेनरेशन
आज से तीन-चार दिन पहले टिकटॉक के सबसे बड़े स्टार फैज़ल सिद्दीकी का वीडियो ट्विटर पर वायरल हो जाता है। वीडियो में फैज़ल अपनी बेवफ़ा सनम के मुंह के ऊपर कुछ ऐसा...
आत्मनिर्भर भारत के दुःखद पहलू !
सवाल तो है कि जब बीस लाख करोड़ के पैकेज से आत्मनिर्भर भारत बनानें कि बातें की जा सकतीं हैं,तो कुछ सौ करोड़ ख़र्च करके इन पैदल चलते लोगों को इनके घर...

















