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सोशल अड्डा

कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है..लेकिन आजकल के हालात को देखते हुए कहीं से नहीं लगता कि आदमी रत्ती भर भी प्राणी का गुण रखता है,वो देश -दुनिया और समाज को बनाने-बिगाड़ने की तो खूब बातें करता है..लेकिन बड़ी विडम्बना है कि खुद को छोडकर पूरा समाज बदल देना चाहता है..यहाँ  हमारा समाज   में चर्चा करेंगे विभिन्न ज्वलंत और सामाजिक मुद्दों पर.पहल करेंगे खुद को बदलने की

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डिप्लोमा इन दुनियादारी 

गाँव के स्कूल में एक मास्टर साहेब थे.नाम था तिरलोचन तिवारी उर्फ़ मरखहवा मास्टर.ज्ञान को हमेशा कपार पर उठाये रहते थे.माघ के जाड़े में भी उनको देखने पर जेठ का एहसास होता था.उनके इस...
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WhatsApp हमें क्या सिखाता है ?

सपनों में उलझी है जिंदगी.हम सुलझा रहे हैं दिन-रात...आ रहे हैं,जा रहे हैं,भाग रहे हैं,जाग रहे हैं.कुछ देर बाद सुलझन की एक डोर में पकड़ आती भी है तो कम्बख्त एक दूसरी उलझन सामने ...
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जाड़ा,ऑटो,अंकल और वो अकेली लड़की

वाकया थोड़ा पुराना है..जनवरी की  कोई ठण्डी सी शाम होगी..बीएचयू से क्लास करके लौट रहा था..जाड़ा अपने पूरे शबाब पर..जहाँ तहाँ लोग अपने दांत को तीव्र लय में किटकीटाकर अलाव ताप रहे थे. गुरु जी...
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Social Media का सार्थक उपयोग कैसे करें ?

चार फिट सात इंच का सिंटूआ गाँव से पहली बार बनारस  पढ़ने के लिए आया था.कहतें हैं तब उसके चेहरे से मासूमियत की गंगा-जमुना बहती थी.दाढ़ी-मूंछें भी तो ठीक से नहीं आईं थीं.माँ ने...
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हमने देश के लिए क्या किया साहेब

​कल से मोहल्ले के एक ड्यूड क्रांतिकारी फेसबुक पर बवाल काट दिए हैं.कल जहाँ सब लोग सुबह उठकर तिरंगे झंडे के साथ गणतंत्र दिवस मना रहे थे.?वहीं वो शरद पवार का फ़ोटो डालकर पूछ...
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समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई..

​एक थे बैजू पांड़े.जिला बलिया के  रँगबाज..छह फिट के छरहर जवान, धरती दबा के आ सीना फुलाके जब चलते थे तो गाँव-जवार के लोग उनको चार सौ मीटर दूर से ही प्रणाम करते थे.माई-बाप...
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Social Media Addiction – आभासी इश्क के खतरे जानिए

कल फेसबुक खोलते ही देखा कि हमारे किशोरीलाल अंकल जी का चेहरा शाहरुख खान से मिल गया है और वो ऊंचास लोगों को टैग करके इस उपलब्धि का लहरिया कट में जश्न मना रहे...
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इवेंट मैनेजमेंट बनाम देहाती मैनेजमेंट

समाचार ई बा कि बबलुआ के हाड़े हरदी लागे के तैयारी हो रहल बा..हित-नात लोग आवे के तैयारी में बा.।बुढ़िया फुआ काल्ह ओहपार से आ गइल बाड़ी।घर-दुआर रँगा,पोता रहल बा.दुआर पर मड़ई के जगह...

अम्मा मेरे बाबा को भेजो री ( अहा ! ज़िंदगी में प्रकाशित )

फागुन में बेटी का ब्याह क्या तय हुआ,पिता की परीक्षा उसी दिन से शुरू हो गई। बुआ को बुलाना है,मौसी नहीं आएंगी तो पक्का नाराज़ हो जाएंगी। गुजरात वाले फूफा तो अक़्सर नाराज...

बाढ़,जेम्स प्रिंसेप और काशी के शाही नाले की कथा…

सुबह-सुबह अस्सी घाट के पुरनिये आठ कचौड़ी,तेल में तर तीन प्लेट कोहड़ा की तरकारी,दूई पाव जलेबी,सौ ग्राम दही के बाद जब बाबा बूटी की छानते हैं,तब जाकर तीन किलोमीटर लंबी डकार उतपन्न...

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