Thursday, November 14, 2019
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सोशल अड्डा

कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है..लेकिन आजकल के हालात को देखते हुए कहीं से नहीं लगता कि आदमी रत्ती भर भी प्राणी का गुण रखता है,वो देश -दुनिया और समाज को बनाने-बिगाड़ने की तो खूब बातें करता है..लेकिन बड़ी विडम्बना है कि खुद को छोडकर पूरा समाज बदल देना चाहता है..यहाँ  हमारा समाज   में चर्चा करेंगे विभिन्न ज्वलंत और सामाजिक मुद्दों पर.पहल करेंगे खुद को बदलने की

प्रेम बनाम आकर्षण

कहा गया है कि आदमी प्रेम में हो और प्रेमी या प्रेयसी को पूजने का मन न करने लगे,तो समझ लेना चाहिए...

अम्मा मेरे बाबा को भेजो री ( अहा ! ज़िंदगी में प्रकाशित )

फागुन में बेटी का ब्याह क्या तय हुआ,पिता की परीक्षा उसी दिन से शुरू हो गई। बुआ को बुलाना है,मौसी नहीं आएंगी...

फ़ेसबुक बनाम यू ट्यूब – यूज़र से डॉलर बनते लोग

एक दिन देख रहा कि मम्मी-पापा ने तीन साल की बेटी का टिक-टॉक वीडियो फेसबुक पर अपलोड किया है। उसके मिलियन व्यूज...

सुख-दुःख की छोटी बातें

घर से लौट रहा था। बेहिसाब गर्मी थी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय सेमेस्टर की परीक्षा ले रहा था। देख रहा ट्रेन पकड़ने के...

नेपाल यात्रा संस्मरण

तीस मई का सूरज आसमान में जल रहा है। तापमान पैंतालीस। शरीर का पसीना चावल में अदहन की तरह फफ़ा रहा। मोबाइल...

इश्क़ वाली चाट ( कहानी )

गर्मी की साँझ थी। बादल रह-रहकर उमड़ते थे लेकिन बरसते न थे। लड़के ने अपनी पतली कलाई में उलझी चालीस रुपये वाली...

ए बबुआ के पापा…

बबुआ के पापा बनारस आएं हैं। सुना है बबुआ इंजीनियरिंग की कोचिंग करेगा.. सुबह से बबुआ के पापा फोन करके परेशान कर...

बाज़ारवाद की गिरफ्त में हमारी संवेदना

एक दिन अखबार लेकर बैठा था कि एक खबर पर नज़र थम गई..देखा नोएडा में एक कार हादसा हुआ है। कार जलने...

सौरभ सिंह शुजा और ईवीएम (बुद्धि हैकिंग की प्राचीन कथा )

तब हम छठवीं के छात्र थे..यानी कक्षाकार्य और गृहकार्य में पिस रहा….खेलने और टीवी देखने को तरस रहा…हिसाब से पढ़ने के लिए...

प्रतियोगिता काण्ड ( इम्तेहान के किस्से )

हाल-ए-दिल ये था कि प्रतियोगिता दर्पण देखते-देखते पता नहीं चल रहा था कि दर्पण में खुद को देखे कितने दिन हो गए...

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उस्ताद..आज आपके साथ थोड़ा बनारस भी बिक गया

सादर प्रणाम   उम्मीद है आप जहाँ भी होंगे सकुशल होंगे..देखिये न आज आपके बनारस में सूरज दिल खोलकर निकला है,हवा पंख खोलकर बह रही...
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मंटूआ-पिंकीया की असली प्रेम कहानी

मौसम में हल्की नमी थी और हवा में बंसत की सुवास.आसमान में देखते ही मन उड़ने लगता था.मानों वो चिल्ला-चिल्ला के कह रहा हो."अब...
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बी.टेक्स वाले दुल्हनिया ले जाएंगे ?

आज छत पर धूप पसरी  है.अखबार लेकर बैठा हूँ.आसमाँ भी साफ़ है.पक्षी भी उड़ रहे..नावें भी ठीक से चल रहीं.लेकिन कमबख्त मेरा दिल बैठा...
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डिप्लोमा इन दुनियादारी 

गाँव के स्कूल में एक मास्टर साहेब थे.नाम था तिरलोचन तिवारी उर्फ़ मरखहवा मास्टर.ज्ञान को हमेशा कपार पर उठाये रहते थे.माघ के जाड़े में...
whatsapp success story

WhatsApp हमें क्या सिखाता है ?

सपनों में उलझी है जिंदगी.हम सुलझा रहे हैं दिन-रात...आ रहे हैं,जा रहे हैं,भाग रहे हैं,जाग रहे हैं.कुछ देर बाद सुलझन की एक डोर में...