Tuesday, April 23, 2019

राजनीतिक विचार

कभी लोहिया ने कहा था कि राजनीति अल्पकालीन धर्म है और धर्म दीर्घकालीन राजनीति है..आज जब धर्म और राजनीति दोनों का ह्रास जारी है ...ईमानदारी,नैतिकता और सुचिता जैसे शब्द तो बीते समय की बातें हो गयीं हैं....आज  जब गुड पालिटिक्स और बैड पालिटिक्स का समय है तब हमें अपनी चेतना को जगाकर अपने राजनीतिक विचार पर मंथन करना पड़ेगा.  हम समुन्द्र मंथन नहीं वैचारिक मंथन करेंगे

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एक फेसबुक क्रांतिकारी की क्रांति कथा

एक दिन की बात है.दिन रात   Facebook पर  दुनिया बदलने की बात करने वाले बुद्धिजीवी क्रांतिकारी से   मिलने उनके घर गया...बेचारे कई दिन...
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रतिया कहाँ बितवला ना…..

सम्पूर्णआनंद विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा कक्षा- तेरह बिषय- समाज शास्त्र पूर्णाक- 420 परीक्षार्थी... कूदन  शास्त्री रोल नम्बर...रोज रोज लिखीं मरदे काल्ह लिखले रहनी न (प्रवेश पत्र पर एगोड़ी के आई...
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बबुनी बीड़ी पियत जात रहली डोली में…..

हमारे भोजपुरिया क्षेत्र में नाच का कभी जबरदस्त क्रेज था.तब आर्केस्ट्रा की फ़ूहड़ता का प्रभाव ठीक से नहीं हुआ था.मैं भी पैदा नहीं हुआ...
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हाय…! जीजा आप केजरीवाल न हुऐ ( वायरल पोस्ट )

यूँ तो जीजा नाना प्रकार के होते हैं...किसिम किसिम के ।अफ़सोस कि जीजा साली के सम्बंधों पर आजतक सिर्फ सड़क छाप शायरी ही हुई...

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उस्ताद..आज आपके साथ थोड़ा बनारस भी बिक गया

सादर प्रणाम   उम्मीद है आप जहाँ भी होंगे सकुशल होंगे..देखिये न आज आपके बनारस में सूरज दिल खोलकर निकला है,हवा पंख खोलकर बह रही...
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मंटूआ-पिंकीया की असली प्रेम कहानी

मौसम में हल्की नमी थी और हवा में बंसत की सुवास.आसमान में देखते ही मन उड़ने लगता था.मानों वो चिल्ला-चिल्ला के कह रहा हो."अब...
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बी.टेक्स वाले दुल्हनिया ले जाएंगे ?

आज छत पर धूप पसरी  है.अखबार लेकर बैठा हूँ.आसमाँ भी साफ़ है.पक्षी भी उड़ रहे..नावें भी ठीक से चल रहीं.लेकिन कमबख्त मेरा दिल बैठा...
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WhatsApp हमें क्या सिखाता है ?

सपनों में उलझी है जिंदगी.हम सुलझा रहे हैं दिन-रात...आ रहे हैं,जा रहे हैं,भाग रहे हैं,जाग रहे हैं.कुछ देर बाद सुलझन की एक डोर में...
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डिप्लोमा इन दुनियादारी 

गाँव के स्कूल में एक मास्टर साहेब थे.नाम था तिरलोचन तिवारी उर्फ़ मरखहवा मास्टर.ज्ञान को हमेशा कपार पर उठाये रहते थे.माघ के जाड़े में...