बचपन का पन्द्रह अगस्त ( अहा ! ज़िन्दगी के अगस्त अंक में प्रकाशित )
ग्राम रघुनाथपुर का उत्तरी बाजार। इस जगह को बाज़ार होने की योग्यता बस इसलिए मिल गई क्योंकि पिछले साल बाढ़ के समय सरकार ने एक अस्पताल बनवा दिया था। और एक महीने के भीतर...
अश्लीलता के टेम्पो पर सवार भोजपुरी
शादी-ब्याह के दिन में शगुन उठ रहा हो या घर में कोई शुभ कार्य हो रहा है..जैसे ही घर की बुढ़िया माई अपना आँचल सीधा करके गाती हैं। "गाई के गोबरे महादेव अंगना लिपाई"...
जीवन में बचाने लायक क्या है ?
एक मित्र बड़े परेशान रहते थे कि नौकरी नहीं है और जिम्मेदारी चक्रवृद्धि ब्याज की तरह बढ़ रही है। बाल पक गए,शादी न हुई,घर भी नहीं बना,सब डिग्री और योग्यता माटी में मिली जा...
भोजपुरी का नया सिनेमा- इन पांच शार्ट फिल्मों को नहीं देखा तो क्या देखा...
रोज सैकड़ों अश्लील एलबम, हजारों अश्लील गीत, भोजपुरी में भोजपुरी को छोड़कर सब कुछ दिखातीं दर्जनों फिल्में।
मस्तराम के मामा को मात देने को बेताब डब्बू डेंजर और सलिल सहकल जैसे रोज पैदा होते करोड़ों...
गाँव-जवार का फगुआ गान (अहा ! ज़िंदगी के मार्च अंक में प्रकाशित )
गांव के ताल-पोखरा हो या अमराई,महुवा के चिकनाते पत्ते हों या बंसवार में फूटते कोंपल.काली माई का दुआर हो या लाई-दाना भूजने वाली घोसार.गांव मन ही मन होली की तैयारी करने लगा है। सुबह...
ध्रुपद मेला : जिनगी के झमेला में आनंद का मेला
जिनगी वो मेला है,जिसमें आखिरी सांस तक झमेला है.इस मेले में उदासियों के समियाने खड़े हैं,तो कहीं नांचती चरखी पर बैठे फलानें। जरा सा आगे बढ़ने पर मौज की बनती पकौड़ी दिखती है,तो कहीं...
लोक में अश्लीलता बनाम भोजपुरी की अश्लीलता
जैसे ही गाँव में इकलौते साले जी का आगमन होता है.गाँव के रोम-रोम में जीजत्व की भावना संचरण करने लगती है.वो साला उर्फ सार किसी एक का नहीं,बल्कि गाँव के समूचे खेत-खलिहान,मूंज-ऊख सिवान और...
पियवा से पहिले हमार रहलू ( सन्दर्भ सहित व्याख्या )
प्रश्न - भोजपुरी के लोकप्रिय गीत 'पियवा से पहिले हमार रहलू' की सन्दर्भ सहित व्याख्या करें।
अथवा
"रात दिया बुता के पिया क्या-क्या किया" की सारगर्भित विवेचना करें।
उत्तर - प्रस्तुत करेजा फॉर गीत "पियवा से पहिले...
भिखारी ठाकुर की भोजपुरी साफ्ट पोर्न का हब कैसे बनी ?
वो साठ का दशक था, तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे,ले-देकर दशहरा के समय दरभंगा और अयोध्या से आने वाली रामलीला मण्डली का आसरा था। कहीं से खेलावन बाबा को पता चलता कि...
उस्ताद..आज आपके साथ थोड़ा बनारस भी बिक गया
सादर प्रणाम
उम्मीद है आप जहाँ भी होंगे सकुशल होंगे..देखिये न आज आपके बनारस में सूरज दिल खोलकर निकला है,हवा पंख खोलकर बह रही है...पक्षी दिल खोलकर उड़ रहे हैं.कहीं दूर एक बांसुरी की...

















