उस्ताद..आज आपके साथ थोड़ा बनारस भी बिक गया
सादर प्रणाम
उम्मीद है आप जहाँ भी होंगे सकुशल होंगे..देखिये न आज आपके बनारस में सूरज दिल खोलकर निकला है,हवा पंख खोलकर बह रही है...पक्षी दिल खोलकर उड़ रहे हैं.कहीं दूर एक बांसुरी की...
जब उस्ताद ने अमेरिका वालों से कहा…मेरी काशी मेरी गंगा ला दो..
1982 के दिन.... अमेरिका के एक बड़े शहर में आयोजित कार्यक्रम.... वहां के लोग उस्ताद से जिद्द कर देतें हैं कि "आप यहीं रह जायें तो बड़ा अच्छा हो..."उस्ताद इस बात को अनसुना कर...
अल्लाह वालों से अल्लाह बचाये
राधा कृष्ण तब ज्यादा सुंदर दिखतें हैं जब फैसलाबाद पाकिस्तान में पैदा हुआ कोई नुशरत फतेह अली खान तार सप्तक के धैवत पर जाकर गाता है...
"जबसे राधा श्याम के नैन हुये हैं चार
श्याम बनें...
मनोरंजन के लिये नही है संगीत
अपने चाइना वाले मोबाइल पर भले बलिया जिला का सिंकूवा..."रतियाँ कहाँ बितवला ना" जोर से बजाए.या बीएचयू के सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉस्टल में रहने वाले हिंदी साहित्य में भक्तिकाल के शोधार्थी.सीरी फलाना जी...
आज दुनिया क्यों बोलती है “वाह उस्ताद”
1955 के आस-पास मुंबई के एक घर में पति-पत्नी में सलाह चल रही होती है कि उनका बेटा बड़ा होके क्या बनेगा? माँ कहती है.. नही ये पढ़ेगा .....पिता कहतें हैं..नही ये वही करेगा...












