एक पटाखा विमर्श…
ये मौसम बदलने का मौसम है। एक झटके में सुबह की नर्म हवा दोपहर की गर्म हवा में इस तरह बदल जाती है,मानों समूचे मौसम विभाग की जिम्मेदारी किसी नेताजी ने अपने कपार पर...
गाँव-जवार का फगुआ गान (अहा ! ज़िंदगी के मार्च अंक में प्रकाशित )
गांव के ताल-पोखरा हो या अमराई,महुवा के चिकनाते पत्ते हों या बंसवार में फूटते कोंपल.काली माई का दुआर हो या लाई-दाना भूजने वाली घोसार.गांव मन ही मन होली की तैयारी करने लगा है। सुबह...
भोजपुरी संगीत अश्लील क्यों है ? ( इतिहास और वर्तमान पर एक नज़र )
वो साठ का दशक था,तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे। ले-देकर दशहरा के समय दरभंगा और अयोध्या से आने वाली रामलीला मण्डली का आसरा था। कहीं से...
तू लगावे लू जब लिपिस्टिक……
प्रश्न - कालजयी गीत 'तू लगावे लू जब लिपीस्टिक" पर टार्च लेकर प्रकाश डालें.
उत्तर...
भावर्थ - "तू लगावेलू जब लिपीस्टिक" भोजपुरी की सबसे वैज्ञानिक आध्यात्मिक,कालजयी और महान कृति है.कवि सीरी जाहिद कुमार 'जाहील' और गायक...
सरकारी सुहागरात योजना
हमारे यहां लौंडे की शादी के दिन जैसे-जैसे नजदीक आते जातें हैं.वैसे-वैसे उसके स्वभाव में ही नहीं वरन पहनावा,चाल-चलन,कालर ट्यून से लेकर वालपेपर तक बदलते जातें हैं.यहाँ तक की उसके सुहाग रात के सपने...
बबुनी बीड़ी पियत जात रहली डोली में…..
हमारे भोजपुरिया क्षेत्र में नाच का कभी जबरदस्त क्रेज था.तब आर्केस्ट्रा की फ़ूहड़ता का प्रभाव ठीक से नहीं हुआ था.मैं भी पैदा नहीं हुआ था.लेकिन मनोज तिवारी पटरी भाठा लेकर स्कूल जाते थे.निरहू और...
गाँव से रामलीला की Live Coverage ( वायरल पोस्ट )
राजा दशरथ बैठकर अभी बीड़ी पी रहें हैं.बगल में सीता जी से कुम्भकर्ण ने कहा है कि "थोड़ा मोबाइलवा चार्ज में लगा दो न..सरवा टावरे नहीं पकड़ रहा है इधर.मेहरारु को फोन करना है..खिसिया...
एक ऐसी भाषा जो हर जगह समझी जाती है
MUSIC कार्यक्रम के सिलसिले में अक्सर यात्रावों में रहना होता है। कभी कभी यात्रायें इतनी ज्यादा हो जाती है कि जीवन खानाबदोश जैसा लगने लगता है ।
हर दूसरे दिन नई जगह नए लोग नई...
लहंगा में लोकपाल ( शादी स्पेशल व्यंग )
रोजी का लहंगा पम्मी के लहंगे से महंगा और सुंदर है..इस पर कल सवा चार घण्टा बहस चली...एक बार लोकपाल बिल और जीएसटी बिल पर सहमति बन सकती थी...लेकिन किसका लहंगा सुंदर है..इस बहस ...
एक गुमनाम आईआईटीयन
वो सुबह की ठंडी हवा की तरह यूँ ही टकरा जाते। कभी तुलसी घाट पर स्न्नान करते तो कभी विश्वनाथ गली के भेडियाधसान में पान खाते।
किसी सुबह हम...
















