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जीवन संगीत

एक जगह कहते हैं कि जीवन में अगर कुछ बचाने लायक है तो वो है जीवन संगीत यानी जीवन संगीत जो ये बचा लेता है सब बचा लेता है जो ये खो देता है सब खो देता है..संगीत को सिर्फ मनोरंजन समझना मनुष्य की की गयी सबसे बड़ी गलतियों में से एक है..यहाँ हम आपको बताएंगे की ये जीवन संगीत कैसे एक दूसरे से परस्पर जुड़े हुए हैं..आपका जीवन  संगीत पेज पर स्वागत है

एक गुमनाम आईआईटीयन

वो सुबह की ठंडी हवा की तरह यूँ ही टकरा जाते। कभी तुलसी घाट पर स्न्नान करते तो कभी विश्वनाथ गली के भेडियाधसान में पान खाते। किसी सुबह हम...

लिट् फेस्ट से आहत कवि

कवि चिंगारी की खिड़की पर कविताओं का मौसम उतर आया था। पिछले एक हफ्ते में उन्होंने बयालीस कविताएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं को भेजी थी। भेजने को तो वो पचास कविताएं और भेज सकते...

हँसी-खुशी हो ली…

बाहर का मौसम बदलते ही मन का मौसम भी बदलने लगता है। इन दिनों खिड़की खोलते ही ताजी हवा जादू जैसा काम करती है और देखते ही देखते चित्त में बैठी धूल...

एक माइल्ड सा दर्द !

सब्जी की दुकान पर खड़ा होते ही एक मीडिल क्लास आदमी सबसे पहले इकोनॉमिस्ट बन जाता है। ग़लती से दो-चार सौ की सब्ज़ी आपने ले ली तो महंगाई की तरह आपकी बीपी...

कहीं न जाने वाले रास्तों पर !

मौसम अब हथेली की तरह गर्म होने लगा है। सुबह का सूरज खिड़की पर आकर जगा जाता है। दोपहर भी कहती है,रुकना नही है लेकिन साँझ आते-आते मन किसी छोटे बच्चे सा...

भोजपुरी संगीत अश्लील क्यों है ? ( इतिहास और वर्तमान पर एक नज़र )

वो साठ का दशक था,तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे। ले-देकर दशहरा के समय दरभंगा और अयोध्या से आने वाली रामलीला मण्डली का आसरा था। कहीं से...

व्यर्थ आवाज़ों की सार्थकता

साँझ सवेरे खिड़की पर गौरैया,कबूतर आकर बोल जाते हैं। न जाने क्या, बहुत जल्दी-जल्दी ! कभी ख़ूब तेज आवाज़ में,कभी मद्धिम। कभी लगता है कोई मेरे ऊपर ताना मारकर चला गया,

इमोशन का जन-धन एकाउंट !

पिछले दो-तीन पोस्ट पढ़कर एक मित्र नें कहा कि इतना ह्यूमर कहाँ से लाते हो भाई ? मैनें कहा,"जनधन एकाउंट में जमा किया है,जब-तब निकाल लेता हूँ। मित्र मुस्करा...

एक पटाखा विमर्श…

ये मौसम बदलने का मौसम है। एक झटके में सुबह की नर्म हवा दोपहर की गर्म हवा में इस तरह बदल जाती है,मानों समूचे मौसम विभाग की जिम्मेदारी किसी नेताजी ने अपने कपार पर...

मैं नए जमाने का पुराना आदमी हूँ…

घर के किसी कोने में फेंके हुए हल,जुआठ,खुरपी,हंसुआ देखकर आज भी कदम ठिठक से जाते हैं। हल की मूठ से अपने पुरखों की स्मृतियों का धूल झाड़ते हुए आज भी महसूस होता है...बाबा के...

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