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गाँव-जवार

शहर में रहते-रहते खेत खलिहान और बाबा का दालान कब छूट गया पता न चला,अब तो बस यादों में गाँव बसा है.फ़िल्म और टीवी में ही देखकर हम खुश हो जाते हैं..और सबसे बड़ी बात कि गाँव की बातें और चिंता तो सभी करते हैं लेकिन अफ़सोस कि गाँव की ओर कोई जाना नहीं चाहता है...आइये  हम आपको ले चलते हैं खेत-खलिहान और गाँव की ओर,मिलवाते हैं गाँव के मजेदार किस्सों से..महसूस करवाते हैं गाँव की खूबसूरती को..

छठ पूजा- दुःख का ढंग अलग है लेकिन रंग एक है।

रात के साढ़े नौ बज रहे हैं। अंधेरी में हुई आठ घण्टे की एक लंबी सीटिंग के बाद आँखों के सामने अब अंधेरा छानें लगा है। जाना तो आरामनगर भी था। लेकिन...

रोना-कोरोना और मैला आँचल…

वैशाख से लेकर आसाढ़ तक जहाँ ज़िंदगी का स्वाद तीन पैसा लबनी मिलता था और हलवाहे-चरवाहे भी जहाँ नबाबी करते हुए कहते थे.. "तीन आने लबनी ताड़ी,रोक साला मोटर...

कहत भिखारी भयावन लागे…

परसो रात के सन्नाटे में अस्तित्व का साज बज रहा था कि बारिश नें कोरस करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आसमान नगाड़े जैसा बजने लगा। हवा किसी हारमोनियम की भाथी...

बसंत किलकंत है… ( ग्राम्य डायरी )

सरसो पियरा चुका है…हवा जब-जब बहती है,तब-तब मटर के फूल,गुलाब के महंगे फूल को मात देते हैं। चना पर ओस की बूंदों को देखकर,मन मुदित हुआ जाता है। धूप होते ही नवम्बर...

शहर माथे पर रखा तनाव है,गाँव थाती में मिला सूकून

गाँव में सुबह उठते ही बुद्धत्व की प्राप्ति हो जाती है.और पता चलता है कि रात का बिछौना सुबह ओढ़ना हो जाए उसे चैत का महीना कहतें हैं. खटिया पर ऊंघते हुए देखता हूँ सात...
traditional village holi

गाँव-जवार का फगुआ गान (अहा ! ज़िंदगी के मार्च अंक में प्रकाशित )

गांव के ताल-पोखरा हो या अमराई,महुवा के चिकनाते पत्ते हों या बंसवार में फूटते कोंपल.काली माई का दुआर हो या लाई-दाना भूजने वाली घोसार.गांव मन ही मन होली की तैयारी करने लगा है। सुबह...

लोक में अश्लीलता बनाम भोजपुरी की अश्लीलता

जैसे ही गाँव में इकलौते साले जी का आगमन होता है.गाँव के रोम-रोम में जीजत्व की भावना संचरण करने लगती है.वो साला उर्फ सार किसी एक का नहीं,बल्कि गाँव के समूचे खेत-खलिहान,मूंज-ऊख सिवान और...
hindi story by atul kumar rai

“विरह के नांच” ( कहानी )

भौजी खाना बना रहीं थीं.तब तक पड़ोस की गीता आ गयी.."ए भौजी.आज बड़ा उदास हो,का बात है.आज भइया के ढेर याद आवत है का.आँय' ? भौजी बिन बोले रोने लगीं..गीता ने कंधे पर हाथ...
kolkata story by atul kumar rai

रोजगार,पलायन,प्रेम बनाम पूरब देश की विरह कथा

खेदन सिंग बियाह कराने गए...परछावन में इतना खुश थे कि देखते बन रहा था.बाबी बैंड पार्टी सिकन्दरपुर बलिया ने "जीमी जीमी आजा आजा" बजाने के बाद बराती लौंडो को खूब नागिन डांस नचाया....दुआरे बरात...

मेरे गाँव में बस इतना बचा है गाँव

गर्मी की छुट्टी आते ही गांव नामक निरीह शब्द पर एक साथ कई हमले होतें हैं..पहला हमला होता है दिल्ली,नवेडा, लोधियाना से पधारे मोहन गुड्डू और सुग्गन,भोला,राधेश्याम,बब्बन,मुन्ना टाइप प्रजाति का.इस प्रजाति के लोग दो...

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