हमार भोजपुरी ग़ज़ल

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जे कबो सबका के रस्ता बतावत रहे
देखीं उहे आज रस्ता भुलाइल बा

काल्ह घर घर में जाके हमके जोहत रहे
आज उहे अपना घर में लुकाइल बा

इहे भइल खता उनसे मुहब्बत भइल
इ दिल ना ,दरिया ह केसे बन्हाइल बा

उ आदमी ना ह सच में फरिस्ता हवे
जे गरीबन के कभी काम आइल बा

रउवा अइतीं त ऐइजा अंजोर हो जाइत
दिल के झोपडी के दिया बुताइल बा

तू नफरत फैलवला अपना कुर्सी खातिर
आज आदमी से ही आदमी डेराइल बा

अपना जिनगी के इहे हकीकत बाटे
की नेह के डोर से सभ बन्हाइल बा

एके कविता कहानी ना ग़ज़ल कहब
इ दिल के बात ह सीधे कहाईल बा

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जाके कही द ना बरखा बदरीया से कागा
अब आसाढ़ में खेतवा जेठ अस जरेला

ढेर सोचा मत सोचबS त कुछ ना होई
केहू नीमन कहे केहू बाउर कहेला

जेकर जर जाला हाथ पिए में दूध
अब उहे न माठा फूंक फूंक पियेला

अभीले छिपवले बा हमरा से कुछउ
आखिर उ देख देख काहें हँसेला

तोहार बड कुछ कहे त ध्यान से सुनिहा
ना त आदमी अफदरा में बुरा फंसेला

जेके चले के रास्ता बतवनी ह हम
उहे अब हमरा के पागल कहेला

जे भी हट के कुछऊ इहंवा नाया करी
उ त दुनिया में पागल कहइबे करी

तू बइठ के इहंवा ना सोचल करा
अरे गइल बा त आखिर अइबे करी

लाख कतनो छुपावा मुहब्बत के तू
तोहरा आँखी से सब कुछ बुझइबे करी

जेके आपन माना ओके दिल से माना
ना त कुछ दिन बाद गैर हो जइबे करी

जब समय होखे पातर त चुपचाप सूना
जेके कुछ ना आवे ऊ समझइबे करी

उनके गौर से ना देखा आतना ले अतुल
नज़र से नज़र मिली त लजइबे करी

दिल के हाल कुछ अइसन भइल बा
की ना सहले सहाता ना कहले कहाता

जेके आज ले हम आपन मानत रहीं
उ गैर हो जाई अब अइसन जनाता

कुछ त दोष बा जवानी के शायद
की निमनो बतिया बाउरे बुझाता

जी गाँव में कहाँ अब गाँव बचल बा
अब त जाड़ा में कौड़ा अकेले तपात़ा

अरे हल्ला भइल की कइले बा मर्डर
घूमता बजारी में ना तनीको लजाता

इ नफरत के जहर फइलल बा अइसन
की आदमी से ही आदमी डेराता

अलग बात बा की अपनवले बा आज
उ गिरवले बहुत बा उठावे से पहिले

अँखियाँ में उनकर मयखाना बसेला
उ तरसवले बहुत बा पियावे से पहिले

जेकरा के देखते नीन चैन उड़ गइल रहे
उ जगवले बहुत बा सुतावे से पहिले

जेके गैर जानेनी उ आपन हो जाला
उ रोववले बहुत बा हँसावे से पहिले

अब आपन दिल के बात हमसे कहेला
उ छूपवले बहुत बा बतावे से पहिले

 

उनकर नेह के दिल में अब दिया जरता
उ बूतवले बहुत बा जरावे से पहिले…

ना जाने काहें उ मगरूर लागेला
कबो हमरा नियरा रहे अब दूर लागेला

हम त सुननी की उ अब छोड़ देले बा
अभियो दारु के नाशा में चूर लागेला

भोजपुरी भाषा ना, इ त मिठाई हवे
जइसे जेठ के घामा में गूर लागेला

तब किसानन के मुस्कान देखत बनेला
जब दँवरी में बैलन के खूर लागेला

उनका लीलरा प टिकुली शोभेला आतना
जइसे पूरनमासी के चनरमा के नूर लागेला..

उ खामोस होके कबो कबो बोलेली अइसे
जइसे राग भैरवी में कोमल सूर लागेला

 

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