WhatsApp हमें क्या सिखाता है ?

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whatsapp success story
सपनों में उलझी है जिंदगी.हम सुलझा रहे हैं दिन-रात…आ रहे हैं,जा रहे हैं,भाग रहे हैं,जाग रहे हैं.कुछ देर बाद सुलझन की एक डोर में पकड़ आती भी है तो कम्बख्त एक दूसरी उलझन सामने  खड़ी हो जाती है..तभी शायद फ़िराक़ ने कहा है.
  “मौत का भी इलाज़ हो शायद
जिंदगी का कोई इलाज़ नहीं”

पता चलता है कि एक सपना पूरा नहीं होता कि दूसरे की आस में आँखों से नींद गायब.बहुत पहले कहीं पढ़ा था कि.

Life is Very Complicated,don’t try to find answers because when you find answers life changes the questions

लेकिन करें तो क्या करें..जबाब मिले ये न मिले जिन्दगी के सवाल तो लाज़मी हैं.हाँ क्षोभ और दुःख तब होता है जब सवाल बदल जातें हैं.निराशा और हताशा घेर लेती है.तभी तो रोज कोई राकेश और सुरेश इन सवालों से तंग आकर आत्महत्या कर लेतें हैं..जरा सुबह अखबार खोलिए तो किसी न किसी पन्ने पर मोटे-मोटे अच्छरों में जरूर दिख जायेगा.. ‘जिंदगी से तंग आकर युवक ने फांसी लगाई..परीक्षा में फेल विद्यार्थी ने की आत्महत्या’.

कभी-कभी तो अखबार फ़ेंक देने का मन करता है.समझ में नहीं आता कि प्रतिस्पर्धा ने आदमी से धैर्य छीनकर किस कदर मशीन बना दिया है.लेकिन दोष भी हमारा ही तो है.हम एक पल में निराश हो जातें हैं.हार मान लेते हैं.शायद हमने देखा नहीं या हमें देखना सिखाया नहीं गया कि सफलता के सुर्ख चटक रंग के पीछे निराशा,उत्साह,हार और जीत के न जाने कितने धुंधले रंग छिपे होते हैं.

अब कल ही की बात है..मेरे एक मित्र टकरा गए..बड़े सज्जन और शांत किस्म के व्यक्ति हैं..संयोग से कल उनका जन्मदिन था.हमने शुभकामना दी..वो मुस्कराये..लेकिन बड़ी उदासी के साथ,हमने पूछा “क्या हुआ मित्र ? जन्मदिन के दिन तो सभी लोग खुश होते हैं..फिर साँझ पांच बजे आपके चेहरे पर बारह क्यों बज रहे हैं”?..कहने लगे “अतुल भाई..काहें का जन्मदिन..आपको पता है आज इकत्तीस साल का हो गया,मनचाही नौकरी के लिए दर-दर भटकते-भटकते आज उसके लिये उम्र भी खत्म हो गयी..” साला ऐसा लग रहा जिंदगी अब खत्म.

इतना कहते वो जमीन पर धड़ाम से बैठ गए.बताने लगे कि सभी दोस्तों की शादी हो रही.माँ-बाप अलग चिल्ला रहे,गर्लफ्रेंड ने मेरा वेट करते-करते आखिर माँ-बाप के दबाब में  शादी कर लिया.एक बार लगा अब रो देंगे तब रो देंगे..मैंने बड़ी समझाया अपनी समझ के अनुसार, कहने लगे अतुल भाई जाने दीजिये.आप अपना whatsapp नम्बर दीजिये..मैं whatsapp ही यूज करता हूँ…मैंने दे दिया..और ढाढंस बढ़ाने के साथ उनसे पूछ दिया कि “आप whatsapp यूज करते हैं..क्या आप whatsapp की कहानी जानतें हैं.?.’उन्होंने ‘ना’ में सर हिलाया..

मैंने कहा “मैं कल लिखूंगा  whatsapp वाले उन दो दोस्तों  की कहानी..उन मित्रों की कहानी जो आज लाखों के निराश जीवन में ऊर्जा का संचार कर सकती है..मित्र मुस्कराये..लेकिन मुझे लगा मेरे मित्र क्या आज whatapp यूज करने वाले तमाम लोगों को पता नही होगा की Whatsapp की कहानी क्या है…?
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यूक्रेन

तो भाइयों और बहनों..कहानी शुरू होती है 1976 से ,जहाँ 1976 में यूक्रेन के पास एक छोटे से गांव में एक बालक का जन्म होता है…बच्चे का नाम होता है जॉन कॉम..कॉम की मां एक गृहणी हैं.और पिता  स्कूल बनाने वाली एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकर. वे अक्सर घर से बाहर रहा करते हैं.जीवन बदहाल है..यहाँ तक की दो जून की रोटी जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है.. कॉम और उनकी मां किसी तरह गुजर-बसर करते हैं. मां किसी तरह घर में सबके लिए खाने और बाकी चीजों का इंतजाम करती हैं.ये दिन कॉम की जिंदगी के सबसे चुनौती भरे दिन हैं..भला क्यों न हो..भोजन के लिए संघर्ष इस जिंदगी का सबसे खतरनाक संघर्ष है.

स्कूली जीवन

स्कूल में कॉम की गिनती एक शैतान बच्चे के रूप में हुआ करती है.इसे शैतानी की वजह कहें या उनकी प्रतिभा,कॉम  18 की उम्र तक पहुंचते हुए खुद को कम्प्यूटर नेटवर्किंग का मास्टर बना लेते हैं..यहां तक कि इंटरनेट और नेटवर्किंग से जुड़ी तमाम चीजें सीखकर  कुछ ही दिन बाद एक हैकर ग्रुप वूवू ज्वाइन भी कर लेते हैं.और आगे जिंदगी से जद्दोहद करते हुए कॉम 1997 में सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी जाते हैं.जहाँ उनको प्यारा दोस्त मिलता है.. ब्रायन एक्टन ..एक दिन  ब्रायन और कॉम दोनों ने यूनिवर्सिटी में काम करते YAHOO  में पार्ट टाइम नौकरी करना शुरू कर दिया…कुछ दिन बीते तो server में परेशानी आने पर याहू के फाउंडर फिलो ने कॉम को फोन किया और पूछा कि “वह कहां है” ? तब कॉम ने जवाब दिया कि “मैं क्लास में हूं”.फिलो ने कहा “तुम क्लास में क्या कर रहे हो? मेरी टीम बेहद छोटी है आ जाओ..यहाँ सर्वर की परेशानी को जल्द से जल्द ठीक करना है”बस क्या था.मन मारके कालेज में पढ़ रहे कॉम के हौसले को पंख लग गए.उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी.

तब तक सन 2000 कपार पर था..और देखते ही देखते  कॉम की मां की मृत्यु हो गयी. मृत्यु हुई तो वे अचानक बेहद अकेले हो गए। क्योंकि 1997 में पहले ही उनके सर से पिता का साया हट चुका था.कॉम की जिंदगी उदास और हताश हो गयी.उस वक्त ऐक्टन के सिवाय कोई ऐसा नहीं था जो उनकी भावनाओं को समझ सके..कहते हैं कॉम और एक्टन साथ ही रहते,एक्टन कॉम को अपने घर ले जाते और वहां मन बहलाने के लिए  सॉकर और फ्रिस्बी खेला करते थे।

एक साँझ कॉफी शॉप में बैठ कर कॉम और ऐक्टन दोनों बात कर रहे थे.तभी एक ऐसे कूल ऐप का विचार मन में आया जिसका स्टेटस ये बताए कि आप क्या कर रहे हो। जैसे आप फोन पर हो, बैटरी लो है,जिम में हूं।या बीजी हूँ..उस समय ले देकर मैसेजिंग के लिए skype bbm और g chat ही थे.लेकिन कॉम और ऐक्टन का सपना ये था कि एक ऐसा एप बनाया जाय जो सबके लिये इजी,फ्री और यूजर फ्रेंडली हो.साधारण आदमी भी उसे अपने फोन  नम्बर से बस एक बार लॉग इन करके यूज कर सके.बस क्या था इसी सपने ने मानों उम्मीदों को पर लगा दिया..दोनों ने अपनी कम्पनी प्लान करके याहू जैसी बड़ी कम्पनी छोड़ दिया. और सोचा क्यों न इस महँगे  सपने को पूरा करने के लिए किसी अच्छी जगह  नौकरी भी कर ली जाए.

पड़ी Whatsapp की नींव

जनवरी 2009 था जब दो दोस्तों का सपना Whatsapp के रूप में परिवर्तित हुआ..whatsapp बन तो गया..लेकिन यूजर जब लॉग इन करते तो उनके फोन पर एक otp भेजा जाता.उस समय Otp जिम्मा दूसरे कम्पनी के पास था.कॉम और ऐक्टन के सारे पैसे इस कम्पनी को देने में ही खर्च हो गए..अब लगा ये सपना अब यहीं आकर खत्म हो जायेगा.यहाँ तक की जिंदगी से कभी हार न मानने वाले कॉम भी हताश हो गए.और एक दिन ऐक्टन से कहा कि “क्यों न इसे बन्द कर दिया जाय..और जीने-खाने के लिए एक जॉब कर ली जाय.”ऐक्टन ने कॉम से सच्ची दोस्ती निभाई..और उत्साह बढ़ाते हुए कहा..”अगर हम बन्द करते हैं तो हमसे बड़ा मूर्ख कोई न होगा..”

जब Facebook और Twitter ने नहीं दी नौकरी

कॉम के हौसले में जान आई.फिर दोनों ने मिलकर नौकरी की तलाश की.तब शायद जमाना आ रहा था फेसबुक का.दुनिया लाइक,कमेंट और शेयर में उलझी थी.दोनों की आँखों में फिर एक सपने ने जन्म लिया.क्यों न फेसबुक जैसे बड़े ब्रांड में नौकरी की जाय.कहते हैं दोनों बड़ी उम्मीद के साथ फेसबुक में इंटरव्यू देने गए.लेकिन वहां तो और ज्यादा निराशा हाथ लगी.उन्हें इंटरव्यू में ही छाँट दिया गया.दिल एकदम बैठ सा गया.उदास न होकर वो Twitter के पास पहुँचे.वहाँ भी वही बात हुई.वहाँ भी असफलता ही हाथ लगी.फिर क्या हो..सामने जब एक बड़ा सपना हो.और ऊपर से ये रिजेक्शन.रिजेक्शन तो  बड़े-बड़े  लोगों को तोड़ देता है तो ये लोग तो अभी बड़ा बनने की बस कोशिश ही कर रहे थे.

तभी एक एक आईडीया दिमाग में आया.क्यों न कुछ दोस्तों से मदद ली जाय..आर्थिक मदद.कहते हैं कॉम और ऐक्टन के भले दोस्तों ने करीब दो लाख पचास हजार डॉलर दिया.और दिन रात की लगातार मेहनत से आखिर कॉम और ऐक्टन ने अपना सपना पूरा कर लिया..जिसका परिणाम हमारे सामने है.आज दो लोगों के हाथ से निकलर whatsapp लगभग 185 करोड़ लोगों के  हाथ में पहुंच चूका है.आज सिर्फ भारत में ही बीस करोड़ से ज्यादा whatsapp यूजर हैं.

अगस्त 2014 में फेसबूक ने करीब 19 बिलियन डॉलर में whatsapp को खरीद लिया.मतलब की एक लाख अठारह हजार 237 करोड़ में.ये वही फेसबुक था जिसने कभी कॉम और ऐक्टन नौकरी देने से इंकार कर दिया था.आज forbes के अनुसार  कॉम और ऐक्टन का नाम दुनिया के सबसे धनी लोगों में गिना जाता है.

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wahtsapp headquarters

कहते हैं ये दुनिया की सबसे महँगी डील है.और बड़ी बात ये है कि ये  डील उसी वेल फेयर के ऑफिस में साइन हुई, जहां कभी बचपन में कॉम अपनी माँ के साथ राशन कार्ड लेकर खाना जुटाने के लिए खड़े रहते थे..आज उसी वेल फेयर ऑफिस के बगल में जां कॉम ने वॉट्स ऐप का हेड ऑफिस बनाया हुआ है.मित्रों..एक दिन कहीं पढ़ा था.

 

“इस दुनिया में असम्भव कुछ भी नहीं. हम वो सब कर सकतें हैं.जो हम सोच सकतें हैं..और हम वो सब सोच सकतें हैं..जो आज तक किसी ने नहीं सोचा..”

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संगीत का छात्र, कलाकार, लेकिन साहित्य,दर्शन में गहरी रूचि और सोशल मीडिया के साथ ने कब लेखक बना दिया पता न चला..लिखना मेरे लिए खुद से मिलने की कोशिश भर है।पहली किताब जल्द ही आपके हाथ में होगी.