लाल आतंक से कैसे तबाह हुआ भगवान का घर केरल

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Kerala violence
प्रतीकात्मक

1- जरा कल्पना करें कि रात को आप अपने बीबी-बच्चों के साथ सो रहे हों.और आधी रात को कोई चुपके से आकर पूरे परिवार पर पेट्रोल बम फेंक दे…उधर आप जलते रहें..और अपने परिवार का हवाला देकर उसके सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहें,और वो आपको मरने के लिये छोड़कर चलता बनें…वो भी मात्र इसलिए कि आप उनके राजनैतिक विचारधारा से सहमत नहीं हैं.

जी हाँ..ये इसी देश भारत देश की बात है..जहाँ सहमति-असमहति,सहिष्णुता-असहिष्णुता पर एक गैंग पुरस्कार वापसी करके पुरे देश को दुनिया की नज़रों में कातिल बना देता है….बड़े-बड़े डिबेट होते हैं..आंसूओं की कलम से असहिष्णुता पर अखबार में लेख लिखे जाते हैं..और उन अखबारों को पढ़कर वातानुकूलित कमरों में भारी सुरक्षा के बीच फाइव स्टार जीवन जीने वाले सेलिब्रेटीयों तक को इस देश में डर लगने लगता है.

जी हाँ..उसी देश में वो 28 दिसंबर की रात थी जब कोझीकोड के पलक्कड़ में कुछ लोगों ने भाजपा नेता चादयांकलायिल राधाकृष्णन के घर पर पेट्रोल बम फ़ेंक दिया..तब उनका परिवार गहरी नींद में सो रहा था। सोते हुए लोगों को आग के हवाले करके बदमाश भाग गए। इस हमले में भाजपा की मंडल कार्यकारिणी के सदस्य 44 वर्षीय भाजपा नेता समेत उनके भाई कन्नन और भाभी विमला की मौत हो गई.आपको जानकर ये आश्चर्य होगा कि वो क्षेत्र केरल के पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन का चुनाव क्षेत्र था.. और राधाकृष्णनन और उनके भाई की सक्रियता के कारण वहाँ भाजपा का जनाधार बढ़ रहा था.

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विमला

2- एक सुबह चार बज रहे हों..आपका 20 वर्ष का बेटा अपने दोस्त के साथ मन्दिर से पूजा करके लौट रहा हो..इधर घात लगाये गुण्डे चाक़ूओं से गोदकर उसकी हत्या कर दें…सुबह उसकी लाश पर रोते हुए कैसा लगेगा आपको ?.

जी हाँ..ये भी किसी सीरिया के युद्धग्रस्त इलाके की बात नहीं है.. ये भी इसी भारत देश की बात है…जिस देश में एक इकलाख मर जाते हैं तो एक ख़ास गिरोह चूड़ीयाँ तोड़कर नंगा हो जाता है..और वोट बैंक,जातिवाद,तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली पार्टी लाखों करोड़ों से उनको नवाज देती है.

जी वो भी 13 फ़रवरी की सुबह थी.चार बज रहे थे.जब भाजपा युवा मोर्चा के 20 वर्षीय कार्यकर्ता निर्मल अपने साथियों के साथ स्थानीय कोकुलंगारा मंदिर, पुत्तूर से घर लौट रहे थे.बस घात लगाए कुछ गुंडों ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी.जी हाँ निर्मल ने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं था..सिवाय इसके कि वो भी भाजपा के कार्यकर्ता थे.

3- आप फिर कल्पना करें..आप अपने परिवार को लेकर कार से हंसी-ख़ुशी कहीं घूमने जा रहे हों..और कोई आपके दस वर्षीय बेटे का पैर पकड़ के सड़क पर फ़ेंक दे.आपको और आपकी बीबी को हमला करके बुरी तरह से घायल कर दे… क्या बीतेगी आप पर..?

जी ये भी कोई ईराक की घटना नहीं..ये भी भारत वर्ष की घटना है..जहाँ किसी तथाकथित दलित की आत्महत्या के लिए एक वर्ग महीनों नंगा नांचता है..और उसकी लाश पर बैठकर राजनीती की रोटीयाँ तोड़ता हुये दलित बनाम सवर्ण की गन्दी राजनीति करता है.

जी हाँ..उस दिन भाजपा कार्यकर्ता सुरेश अपने परिवार के साथ कार से जा रहे थे, उसी दौरान मल्लपुरम जिले में तिरूर के नजदीक उन्हीं गुंडों ने घेर लिया। हथियार के बल पर जबरन कार का दरवाजा खुलवाया गया. और उनके गोद से दस माह के बेटे को छीनकर उसके पैर पकड़कर सड़क पर फेंक दिया गया.।

जी ये लिस्ट तो बड़ी लम्बी है…एक-एक घटना बताने लगूं तो डर के मारे आपके शरीर का आधा खून सूख जाएगा.. ये तीन-चार नहीं लगभग तीन सौ लोगों की इसी तरह हत्याएं की गयीं हैं…और ईश्वर न करे कि जब ये टाइप कर रहा हूँ,तब किसी कार्यकर्ता के हत्या की स्क्रिप्ट लिखी जा रही हो.

क्योंकि हर बार हत्या करने वाले वही कम्युनिस्ट होते हैं..जो आपसे-हमसे बड़े ही लच्छेदार शब्दों में अभिव्यक्ति,समानता और साम्यता,लोकतंत्र जैसी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं..और केरल में सन्दीप,प्रमोद, बिनेश, रामचंद्रन, विष्णु, आर अमित, अनिल, राधाकृष्णन, विमला, संतोष जैसे तीन सौ लोगों को बेरहमी के साथ मौत के घाट उतार  देते हैं.

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संदीप

और विडम्बना  ये होती  है कि हर बार की तरह देश की तथाकथित मीडिया जो आपको सनी लियोन के ब्रा-पैंटी का कलर बताने से लेकर आलिया भट्ट के फेवरिट सेक्स पोजीशन को क्रांतिकारी न्यूज बताने से नही चुकती..वो चुप रहती है…न ही प्राइम टाइम वाले पांडे जी की स्क्रीन काली होती है..न ही  किसी प्रकाश-वाजपेयी द्वारा कहीं पुरस्कार वापसी. न ही डफली बजाकर कहीं जन गीत गाया जाता है..न मोमबत्तियां जलाई जातीं हैं… न ही देश में असहिष्णुता बढ़ती है. आप जानते हैं क्यों ?क्योंकि  इस ख़ास गिरोह ने लोगों के दिमाग में एक इंजेक्शन लगा दिया है…वो है प्रगतिशीलता का इंजेक्शन..जहाँ आदमी संघ,बीजेपी,हिन्दू,संस्कृति,संस्कार की बातें करने से कम्युनल जाहिल महसूस करता है..लेकिन जरा कल्पना करें की आरएसएस का कोई कार्यकर्ता किसी की हत्या कर दे तो ? तुरंत प्रतिरोध की संस्कृति खतरे में आ जायेगी कि नहीं.?

 

और देखिये न आज जब अखबार खोलकर बैठा हूँ तो एक समाचार पढ़ रहा कि ‘प्रतिरोध की संस्कृति’ पर लेक्चर देने के लिए किसी उमर ख़ालिद को दिल्ली विश्वविद्यालय में बुलाया गया था…हंसी के साथ रोना भी आ रहा..कितना क्यूट वामपंथ है हमारे देश का मानों ‘अश्लीलता की रोकथाम’ पर सनी लियोनी को किताब लिखने को कह रहा हो.

हाय ! मन में तो आ रहा कि पूछूँ आदरणीय कॉमरेड जी ये तुम्हारी कैसी दोगली प्रतिरोध की संस्कृति है यार .?जहाँ रोज तुम अपने राजनैतिक विरोधियों की हत्याएं करते जा रहे हो…और लोकतन्त्र,अभिव्यक्ति की आजादी और प्रतिरोध की संस्कृति  जैसी लॉलीपॉप-लच्छेदार बाते भी करते जा रहे हो.

क्या तुमको पता नहीं कि तुम्हारे ही पार्टी के सीएम पीनाराई विजयन की सरकार जब से केरल में बनी बनी है तबसे 9 महीने में 10 से ज्यादा संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता अपनी जान से हाथ धो चुके हैं..औसतन हर 25 वें दिन एक नयी हत्या हो जाती है। और हत्या के अलावा हाथ पैर तोड़ना, मारपीट ये तो रोज की बात है। और तो और पुलिस भी भाजपा कार्यकर्ताओं को मौका मिलते ही पीटने से बाज नहीं आती है.. तुमको पता है…इसी फ़रवरी के पहले सप्ताह में भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुये. और दो उपाध्यक्ष गंभीर रूप से घायल होने के साथ दलित भाजपा नेता पी पी बावा हमेशा के लिए दृष्टिहीन हो गए.

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अत्याचार

क्या यही तुम्हारी “प्रतिरोध की संस्कृति है.”? खैर जानता हूँ तुमसे पूछना बेकार है…तुमको पता नहीं कि ये तुम्हारे डीएनएन का दोष है..तुमने तो रूस में शुरू हुई उस लेनिन की लाल क्रांति से सिखा है जो 1917 में शुरू हुई..और स्टालिन तक आते-आते अपने विरोधियों की हत्या की क्रांति में तब्दील हो गयी. अरे ! तुमने भारत के लोकतन्त्र को जबरदस्ती स्वीकार किया है..तुम्हारी सत्ता आजतक बन्दूक की नली से निकलती आई है…आज तक हिंसा की जमीन पर तुम्हारी राजनीतिक फसल लहलहाती रही है..लेकिन तुम्हें दुःख इस बात का है कि भारत की सनातन माटी ने तुम्हें कभी ठीक से पनपने नहीं दिया.जिसके कारण आज तुम पांच भागों में टूटकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हो.
आज हाल ये है की तुम्हारा ये तथाकथित वामपंथ अपनी आखिरी साँस गिन रहा..जहाँ कभी तुम्हारी डूबती नाव की पतवार को उमर खालिद सम्भालते हैं..तो कभी कन्हैया..कभी रोहित वेमुला तो कभी गुरमेहर कौर.जानता हूँ तुम्हारी ये नौटँकी आने वाले समय में और देखने को मिलेगी..ये गुरमेहर और ख़ालिद जैसे नमूने अभी मार्केट में आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ लांच किये जाएंगे..क्योंकि संवेदना के सबसे बड़े होलसेलर तुम ही हो.तुमको इसकी मार्केटिंग अच्छे से आती है .ये भाजपा और आरएसएस वाले यही तो नहीं कर पाते..बस इसी में तुमसे मात खा जातें हैं..खैर छोड़ो..

एक बात बताओ शहीदों की शहादत पर विजय दिवस मनाने वाले आज बार-बार गुरमेहर कौर को शहीद की बेटी कह रहे हो..तो शर्म नहीं आती क्या  ? खैर छोड़ो रहेगी तब तो आएगी.?

लेकिन ये ‘प्रतिरोध की संस्कृति’ जैसी वाहियात बातें कहना बंद करो..ये तुम्हारे मुंह से शोभा नहीं देतीं..चरस  पीकर धर्म को अफीम कहने से फुर्सत मिले तो कभी केरल भी जाकर देख लो जिस भगवान के घर को तुमने कैसे नर्क बना दिया है.

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संगीत का छात्र, कलाकार, लेकिन साहित्य,दर्शन में गहरी रूचि और सोशल मीडिया के साथ ने कब लेखक बना दिया पता न चला..लिखना मेरे लिए खुद से मिलने की कोशिश भर है।पहली किताब जल्द ही आपके हाथ में होगी.