Monday, July 24, 2017
गाँव की ओर

गाँव की ओर

शहर में रहते-रहते खेत खलिहान और बाबा का दालान कब छूट गया पता न चला,अब तो बस यादों में गाँव बसा है.फ़िल्म और टीवी में ही देखकर हम खुश हो जाते हैं..और सबसे बड़ी बात कि गाँव की बातें और चिंता तो सभी करते हैं लेकिन अफ़सोस कि गाँव की ओर कोई जाना नहीं चाहता है...आइये  हम आपको ले चलते हैं खेत-खलिहान और गाँव की ओर,मिलवाते हैं गाँव के मजेदार किस्सों से..महसूस करवाते हैं गाँव की खूबसूरती को..